हर सनातनी की सांसों में बसते हैं श्री राम : योगी
हर सनातनी की सांसों में बसते हैं श्री राम : योगी
गोरखपुर (उप्र) 23 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को कहा कि सनातन परंपरा को मानने वाले हर व्यक्ति की हर सांस में भगवान श्री राम बसते हैं और मर्यादा पुरुषोत्तम का नाम ही ऐसा है जिससे हर कोई अपनापन महसूस करता है।
आदित्यनाथ ने गुरु पूर्णिमा के मौके पर गोरखनाथ मंदिर में आयोजित सात दिवसीय ‘श्री राम कथा’ के उद्घाटन समारोह में मौजूद भक्तों को संबोधित किया।
उन्होंने कहा, ”भक्ति के बिना जीवन केवल अंधेरे से भरा होता है। भक्ति के बिना जीवन में सिर्फ अराजकता और अज्ञानता होती है। भक्ति से प्रेरित ज्ञान ही ऐसे अंधेरे, अराजकता और अज्ञानता से मुक्ति पाने का माध्यम है।”
गोरक्षपीठाधीश्वर ने श्री राम कथा का महत्व बताते हुए कहा, ”सनातन धर्म की परंपरा में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का नाम हर भारतीय की आत्मा से सम्मान और भक्ति के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। सनातन धर्म को मानने वाले प्रत्येक व्यक्ति की हर सांस में भगवान श्री राम बसते हैं। उनका नाम ऐसा है कि चाहे बच्चा हो या बुज़ुर्ग, अधेड़ उम्र का हो या युवा, गृहस्थ हो या साधु, उससे अपनापन महसूस करता है।”
उन्होंने आगे कहा कि देश में आप कहीं भी चले जाएं, चाहे हिंदी बोलने वाले हों या गैर-हिंदी बोलने वाले, अभिवादन के लिए एक ही आवाज सुनाई देती है और वह है ”जय श्री राम।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब के कुछ हिस्सों में आपस में अभिवादन के लिए एक ही वाक्यांश सुनाई देता है और वह है ”राम राम जी।”
उन्होंने कहा कि ये अभिवादन सनातन मूल्यों को दर्शाते हैं।
आदित्यनाथ ने कहा, ”इन अभिवादनों ने न केवल हमें हमारी सांस्कृतिक पहचान से जोड़ा है, बल्कि जीवन की हर स्थिति में आचरण के लिए लक्ष्मण रेखा भी तय की है।”
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश का सौभाग्य है कि वह अपने पवित्र स्थानों और तीर्थ स्थलों के कारण देश का हृदय बना हुआ है। उन्होंने कहा कि जब भी जीवन के किसी भी पहलू में ‘मर्यादा’ की बात आती है, तो सबकी नजरें भगवान श्री राम की ओर मुड़ जाती हैं।
आदित्यनाथ ने कहा कि दुनिया चाहे कितना भी दुर्भावनापूर्ण प्रचार क्यों न करे, ‘सनातन’ मूल्यों को वास्तव में समझने का अवसर केवल उत्तर प्रदेश के तीर्थ स्थलों पर ही मिलता है।
भाषा सलीम संतोष
संतोष

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