उप्र विधानसभा में उठा गलगोटिया विश्वविद्यालय से जुड़ा मामला

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उप्र विधानसभा में उठा गलगोटिया विश्वविद्यालय से जुड़ा मामला

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  • Publish Date - February 19, 2026 / 04:45 PM IST,
    Updated On - February 19, 2026 / 04:45 PM IST

लखनऊ, 19 फरवरी (भाषा) दिल्ली में आयोजित ‘एआई इंपैक्ट समिट’ में गलगोटिया विश्वविद्यालय से जुड़े विवाद की गूंज बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में भी सुनायी दी।

समाजवादी पार्टी (सपा) सदस्यों सचिन यादव और पंकज मलिक ने शून्य काल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए ‘एआई इंपैक्ट समिट’ में उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में स्थित गलगोटिया विश्वविद्यालय के कथित दावे को लेकर उठे विवाद को छात्र-छात्राओं के भविष्य पर प्रश्न चिह्न लगाने वाला करार देते हुए राज्य सरकार से इसकी गहराई से जांच कराने की मांग की।

सपा सदस्य सचिन यादव ने नियम 56 के तहत यह मामला उठाते हुए दिल्ली में आयोजित ‘एआई इंपैक्ट समिट’ में गलगोटिया विश्वविद्यालय से जुड़े विवाद का जिक्र किया और कहा कि उत्तर प्रदेश के इस निजी विश्वविद्यालय ने इंपैक्ट समिट में चीन निर्मित एक उत्पाद को अपना बताकर पूरे विश्व में उत्तर प्रदेश और देश का मजाक बनाया है।

सपा सदस्य ने कहा, ‘‘यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि सदन का मुद्दा है। यह पूरे प्रदेश की निष्ठा का सवाल है।’’

उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी थी कि वह इस बात का सत्यापन करती कि एआई समिट में जो उत्पाद पहुंच रहे हैं, वे वास्तव में शोध करके सम्बन्धित संस्थान द्वारा ही बनाये गये हैं या नहीं।

यादव ने कहा, ‘‘इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। मैं सरकार से अनुरोध करूंगा कि इस विषय की गहराई से जांच हो और कठोर कार्रवाई हो ताकि भविष्य में कोई भी निजी विश्वविद्यालय ऐसा कदम न उठाने पाये।’’

सपा सदस्य पंकज मलिक ने भी कहा कि चूंकि गलगोटिया विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश में स्थित है इसलिये मामले की जवाबदेही राज्य सरकार की भी बनती है।

उन्होंने कहा कि यह विषय केवल एक संस्थान तक सीमित न होकर देश की शैक्षिक विश्वसनीयता, सत्य निष्ठा और भविष्य से जुड़ा हुआ है और यह मामला देश के भविष्य पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है।

मलिक ने आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘एक विश्वविद्यालय जो पैसा कमाने का अड्डा है वह हमारे बच्चों के भविष्य पर प्रश्न चिह्न नहीं लगा सकता। संविधान का अनुच्छेद 21 गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने का दायित्व राज्य पर डालता है। इसे हम नजरअंदाज नहीं कर सकते।’’

उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि वह इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराये और दोषी पाए जाने पर विश्वविद्यालय की मान्यता रद्द की जाए।

हालांकि, समाचार लिखे जाने तक इस पर सरकार का जवाब नहीं आया था।

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में स्थित गलगोटिया विश्वविद्यालय को एआई इंपैक्ट समिट में प्रदर्शित चीन-निर्मित एक ‘रोबोटिक डॉग’ को अपना नवाचारी उत्पाद कहकर पेश किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर उठे विवाद के बीच बुधवार को अपना स्टॉल खाली करना पड़ा था।

विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने एक टीवी चैनल के साथ बातचीत में इस ‘रोबोटिक डॉग’ को अपने स्तर पर विकसित उत्पाद बताया था, जबकि वह असल में चीन की कंपनी ‘यूनिट्री रोबोटिक्स’ का उत्पाद निकला।

भाषा सलीम शफीक

शफीक