‘मियावाकी वन’ विकसित करें विश्वविद्यालय : राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

‘मियावाकी वन’ विकसित करें विश्वविद्यालय : राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

‘मियावाकी वन’ विकसित करें विश्वविद्यालय : राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
Modified Date: July 30, 2026 / 10:17 pm IST
Published Date: July 30, 2026 10:17 pm IST

लखनऊ, 30 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने बृहस्पतिवार को सभी राज्य विश्वविद्यालयों को अपने परिसरों में जगह की उपलब्धता के आधार पर एक से पांच एकड़ भूमि पर ‘मियावाकी वन’ विकसित करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाने का निर्देश दिया।

मियावाकी वन, वृक्षारोपण की एक जापानी तकनीक है। इस पद्धति में बहुत कम जगह में घने और विविध देसी पौधे उगाए जाते हैं।

‘जन भवन’ (पूर्व में राज भवन) द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, राज्यपाल ने राज्य विश्वविद्यालयों से संबंधित मुद्दों की समीक्षा करते हुए और विभिन्न परिसरों के निरीक्षण से जुड़ी अपनी टिप्पणियों को साझा करते हुए निर्देश जारी किये।

राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने निरीक्षण के दौरान पाया कि कुछ विश्वविद्यालय के छात्र छात्रावास की रसोई में तैयार भोजन के बजाय बाहर से खाना मंगवा रहे थे।

उन्होंने कहा, ‘‘यह व्यवस्था फौरन बंद की जानी चाहिए और छात्रावासों में गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाना चाहिए।’’

राज्यपाल पटेल ने आगाह किया कि बाहरी भोजन पर निर्भरता से नशीली दवाओं के दुरुपयोग सहित अवांछनीय गतिविधियों की आशंका भी बढ़ सकती है और विश्वविद्यालयों से परिसरों में बेहतर पर्यवेक्षण एवं सुविधाएं सुनिश्चित करके ऐसे जोखिमों को खत्म करने के लिए गंभीरता से काम करने को कहा।

उन्होंने विश्वविद्यालयों को समय सीमा समाप्त हो चुके अग्नि सुरक्षा उपकरणों को तुरंत बदलने और इंटरनेट सेवाओं की अनुपलब्धता या अपर्याप्तता वाले स्थानों पर वाई-फाई कनेक्टिविटी में सुधार करने का भी निर्देश दिया।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों से शैक्षणिक समारोहों के दौरान दिए जाने वाले पुरस्कारों की बढ़ती संख्या की समीक्षा करने को कहा। उन्होंने कहा कि केवल संख्या बढ़ाने के बजाय सम्मानों के महत्व पर समान जोर दिया जाना चाहिए।

पटेल ने विश्वविद्यालयों द्वारा अंगीकार किये गये गांवों के बच्चों के साथ बातचीत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनमें से कई ने दीक्षांत समारोह के दौरान भाषण देकर, कहानियां सुनाकर, हारमोनियम बजाकर और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेकर दर्शकों को प्रभावित किया है।

राज्यपाल ने आठ भाषाओं में बातचीत करने में सक्षम एक बच्चे का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी प्रतिभा की पहचान की जानी चाहिए और निरंतर प्रोत्साहन के माध्यम से उन्हें बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को इन बच्चों के भाषणों, नाटकों, कहानियों, संगीत और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को रिकॉर्ड करने और उन्हें जन भवन में प्रदर्शित करने का निर्देश दिया।

उन्होंने विश्वविद्यालयों से सामग्री को पुस्तकों में संकलित करने और उन्हें अंगीकृत गांवों में वितरित करने के लिए भी कहा ताकि अन्य बच्चे उनसे प्रेरणा ले सकें।

भाषा सलीम शफीक

शफीक


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