टल्सा नरसंहार के पीड़ितों से मिले बाइडन, कहा केवल सच ही तकलीफ कम कर सकता है

टल्सा नरसंहार के पीड़ितों से मिले बाइडन, कहा केवल सच ही तकलीफ कम कर सकता है

टल्सा नरसंहार के पीड़ितों से मिले बाइडन, कहा केवल सच ही तकलीफ कम कर सकता है
Modified Date: November 29, 2022 / 08:41 pm IST
Published Date: June 2, 2021 11:54 am IST

टल्सा, दो जून (एपी) टल्सा में फलते-फूलते अश्वेत समुदाय को ताउम्र का दर्द देने वाले नरसंहार के सौ साल पूरा होने पर भावुक राष्ट्रपति जो बाइडन ने मंगलवार को घोषणा की कि वह ‘‘उस चुप्पी को तोड़ने आए हैं’’ जो देश में नस्ली हिंसा की बेहद दुखद घटनाओं में एक के बारे में साधकर रखी गई थी।

बाइडन ने कहा, ‘‘कुछ अन्याय इतने घृणित, इतने भयावह और इतने गंभीर होते हैं कि उन्हें दबाया नहीं जा सकता, चाहे फिर लोग इसके लिए कितना भी प्रयास क्यों न कर लें।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे में मरहम का काम केवल सच ही कर सकता है।’’

करीब एक सदी पहले श्वेत लोगों की भीड़ ने सैकड़ों अश्वेत लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। बाइडन ने उन लोगों की स्मृति में यह कहा।

ऐतिहासिक वर्नन अफ्रीकन मैथोडिस्ट एपिस्कोपल चर्च के सामने स्थित ग्रीनवुड एवेन्यू में सैकड़ों लोग बाइडन के इंतजार में खड़े थे। बाइडन यहां ग्रीनवुड सांस्कृतिक केंद्र में आए जहां उन्होंने ऐतिहासिक तस्वीरों को देखा और उसके बाद नरसंहार के तीन पीड़ितों से मुलाकात की।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘चूंकि इतिहास इस बारे में मौन है तो इसका मतलब यह नहीं कि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं। मैं यहां चुप्पी को तोड़ने आया हूं क्योंकि चुप्पी घाव को गहरा करती है।’’

नरसंहार की घटना 1921 में 31 मई और एक जून को घटी थी। टल्सा के ग्रीनवुड जिले को तब ‘ब्लैक वॉल स्ट्रीट’ कहा जाता था। तब श्वेत लोगों की भीड़, जिनमें से अनेक लोगों को अधिकारियों ने वहां पर भेजा था, उन लोगों ने जिले में लूटपाट और आगजनी की थी। उस घटना में टल्सा में रहने वाले कम से कम 300 अश्वेत लोग मारे गए थे।

मंगलवार को बाइडन और उनके शीर्ष अश्वेत सलाहकारों ने ग्रीनवुड समुदाय के तीन लोगों से मुलाकात की थी जो उस हिंसा के प्रत्यक्षदर्शी थे। अब उन तीनों की आयु 101 से 107 वर्ष के बीच है।

बाइडन ने कहा कि अब ‘‘इन सबकी पूरी कहानी सामने आएगी।’’

इनमें से एक महिला लाताशा सैंडर्स ने कहा, ‘‘घटना को घटे 100 वर्ष हो गए और यह पहली बार है जब कोई अमेरिकी राष्ट्रपति हमारी बात सुनने आया है।’’

एपी मानसी उमा

उमा


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