ब्रिटेन ने प्रतिभागियों को कोविड-19 से संक्रमित करने से जुड़े परीक्षण को मंजूरी दी

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ब्रिटेन ने प्रतिभागियों को कोविड-19 से संक्रमित करने से जुड़े परीक्षण को मंजूरी दी

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  • Publish Date - February 17, 2021 / 03:44 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:39 PM IST

लंदन, 17 फरवरी (भाषा) ब्रिटेन के नियामक ने दुनिया के पहले ‘‘कोरोना वायरस ह्यूमन चैलेंज ट्रायल’’ को मंजूरी दे दी है। इस परीक्षण के तहत संक्रमण के प्रसार, प्रतिरक्षा तंत्र पर वायरस के प्रभाव के अध्ययन के लिए प्रतिभागी जानबूझकर संक्रमित होंगे।

सरकार ने बुधवार को कहा कि ब्रिटेन के क्लीनिकल ट्रायल से संबंधित नियामक ने परीक्षण को मंजूरी दे दी है और एक महीने के भीतर यह शुरू होगा। इस परीक्षण का मकसद कोविड-19 से बचाव के लिए और प्रभावी टीका तथा उपचार पद्धति को विकसित करना है।

परीक्षण में 18-30 साल उम्र के 90 प्रतिभागियों को शामिल किया जाएगा और उन्हें ‘‘सुरक्षित और नियंत्रित माहौल में’’ कोविड-19 से संक्रमित किया जाएगा। अध्ययन के जरिए पता लगाया जाएगा कि किसी के संक्रमित होने के लिए वायरस की कितनी मौजूदगी होनी चाहिए।

युवाओं से स्वेच्छा से इस परीक्षण में हिस्सा लेने को कहा गया है क्योंकि कोरोना वायरस से गंभीर खतरे का उन्हें बहुत कम जोखिम है। अध्ययन के दौरान प्रतिभागियों पर लगातार नजर रखी जाएगी।

इंपेरियल कॉलेज लंदन में संक्रामक बीमारी विभाग के मुख्य अनुसंधानकर्ता डॉ क्रिस चिउ ने कहा, ‘‘परीक्षण के जरिए यह देखा जाएगा कि बीमारी खत्म करने में कौन सा टीका और उपचार ज्यादा कारगर है।’’

यह अध्ययन अगले कुछ सप्ताह में शुरू होगा। ब्रिटेन की सरकार ने इसके लिए 3.36 करोड़ पौंड की मदद दी है। इंपेरियल कॉलेज, रॉयल फ्री लंदन एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट और क्लीनिकनल कंपनी एचवीवो ने इसके लिए भागीदारी की है।

बिटेन के व्यापार मंत्री क्वासी क्वार्टेंग ने कहा, ‘‘दुनिया भर में अध्ययनकर्ता और वैज्ञानिक ने कोविड-19 महामारी को समझने और टीका विकसित करने में कामयाबी हासिल की है लेकिन हम इस दिशा में और आगे बढ़ना चाहते हैं। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘टीका विकास में बड़ी कामयाबी मिली है लेकिन हम सबसे भविष्य में सबसे प्रभावी टीके की तलाश करना चाहते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ब्रिटेन में इंसानों पर इस तरह का पहला परीक्षण होगा और वैज्ञानिकों को यह जानने में मदद मिलेगी कि कोरोना वायरस किस तरह फैलता है और टीका के तेजी से विकास का रास्ता भी प्रशस्त होगा। ’’

मलेरिया, टायफाइड, हैजा और फ्लू जैसी कई बीमारियों के लिए उपचार का तरीका विकसित करने में इसी तरह के परीक्षण किए गए

भाषा आशीष उमा

उमा