क्या चीन किफायती एआई के जरिए दुनिया को अपनी तकनीक पर निर्भर बनाना चाहता है ?

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क्या चीन किफायती एआई के जरिए दुनिया को अपनी तकनीक पर निर्भर बनाना चाहता है ?

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  • Publish Date - February 27, 2026 / 12:04 PM IST,
    Updated On - February 27, 2026 / 12:04 PM IST

( निकोलस मोरीसन, देकिन यूनिवर्सिटी )

सिडनी, 27 फरवरी (द कन्वरसेशन) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में चीन की सक्रियता ने अमेरिका की अग्रणी प्रौद्योगिकी कंपनियों के वर्चस्व को चुनौती देना शुरू कर दिया है। हाल के घटनाक्रमों ने यह बहस तेज कर दी है कि क्या एआई की वैश्विक दौड़ में चीन बढ़त हासिल कर रहा है ? और अगर हां, तो उसका इरादा क्या है ?

टिकटॉक की मूल कंपनी बाइटडांस ने हाल में “सीडेंस 2.0” नामक एआई वीडियो टूल पेश किया, जो टेक्स्ट संकेतों यानी ‘प्रॉम्प्ट’ से उच्च गुणवत्ता वाले, फिल्म-जैसे वीडियो तैयार करता है। वहीं, अमेरिकी कंपनी एंथ्रोपिक ने आरोप लगाया कि कुछ चीनी एआई प्रयोगशालाओं ने उसके चैटबॉट क्लॉड के जवाब हासिल करने के लिए हजारों फर्जी खाते बनाए, ताकि अपने मॉडलों को बेहतर बनाया जा सके।

हालांकि उन्नत एआई मॉडल अभी भी मुख्य रूप से अमेरिकी कंपनियां बना रही हैं, वहीं चीन सस्ते और व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले एआई उपकरण विकसित करने पर जोर दे रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, कम लागत वाले चीनी एआई मॉडलों की बाढ़ आने की आशंका है, जो उपयोग संबंधी लागत को लगातार कम कर रहे हैं।

चीन की आधिकारिक नीतियां एआई को देश को विनिर्माण और साइबर महाशक्ति बनाने का “नया इंजन” मानती हैं। 2017 से चीन एआई को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के केंद्र में रखता आया है और 2030 तक वैश्विक एआई नवाचार केंद्र बनने का लक्ष्य घोषित कर चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कीमत एआई अपनाने में निर्णायक भूमिका निभाती है। यदि कोई देश अपने एआई उपकरण इतने सस्ते बना दे कि वे वैश्विक स्तर पर व्यापक रूप से अपनाए जाएं, तो वह प्रभाव स्थापित कर सकता है, भले ही तकनीकी मानकों पर वह पूरी तरह अग्रणी न हो।

चीन अपनी एआई तकनीक को केवल राष्ट्रीय हित तक सीमित नहीं बताता, बल्कि इसे “मानवता के साझा कल्याण” और “मानव सभ्यता की प्रगति” से जोड़कर पेश करता है। इसे उसकी ‘सॉफ्ट पावर’ रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। कम लागत और उच्च गुणवत्ता वाले जनरेटिव मीडिया उपकरण खासकर गैर-पश्चिमी बाजारों में तेजी से फैल सकते हैं, जहां अमेरिकी प्रौद्योगिकी वर्चस्व को लेकर असंतोष है।

आलोचक चेतावनी देते हैं कि चीन का एआई विकास एक ऐसे राजनीतिक ढांचे के भीतर हो रहा है, जो सूचनाओं के नियंत्रण और सेंसरशिप को प्राथमिकता देता है। फ्रीडम हाउस जैसे संस्थानों ने चीन में इंटरनेट स्वतंत्रता की स्थिति को बेहद कमजोर बताया है।

चीन ने 2022 में समाचार फीड और वीडियो प्लेटफॉर्म के एल्गोरिद्म के लिए ऐसे नियम जारी किए, जिनमें “मुख्यधारा के मूल्यों” और “सकारात्मक ऊर्जा” को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि चीनी एआई उपकरण वैश्विक स्तर पर मानक बन जाते हैं, तो अन्य देशों के लिए वैकल्पिक प्रणालियों को अपनाना कठिन हो सकता है। इससे एक रणनीतिक दुविधा पैदा होती है—क्या देश सस्ते और प्रभावी चीनी एआई उपकरणों का लाभ उठाते हुए उन प्रणालियों पर निर्भरता से बच पाएंगे, जो एक अधिनायकवादी मॉडल से प्रभावित हैं?

एआई की वैश्विक प्रतिस्पर्धा अब केवल तकनीकी श्रेष्ठता का प्रश्न नहीं, बल्कि आर्थिक प्रभाव, सॉफ्ट पावर और सूचना नियंत्रण से जुड़ा व्यापक भू-राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।

(द कन्वरसेशन ) मनीषा वैभव

वैभव