(डेनिस ऑल्टमैन, ला ट्रोब यूनिवर्सिटी)
मेलबर्न, 23 अक्टूबर (द कन्वरसेशन) ब्रिटेन के राजकुमार एंड्रयू का विवादों से पुराना नाता रहा है। वर्जीनिया गुइफ्रे की किताब ‘नोबडीज गर्ल’ में एंड्रयू के खिलाफ लगाए गए ताजा आरोपों और मीडिया में आई उन खबरों के बाद ब्रिटिश राजकुमार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं कि वह और उनकी पत्नी सारा बाल यौन शोषण के मामले में दोषी ठहराए गए जेफरी एपस्टीन के लगातार संपर्क में थे।
गुइफ्रे ने इस साल की शुरुआत में खुदकुशी कर ली थी। उन्होंने एंड्रयू पर आरोप लगाया था कि वह जब 17 साल की थीं, जब ब्रिटिश राजकुमार ने तीन मौकों पर उनका यौन उत्पीड़न किया था। हालांकि, एंड्रयू ने इन आरोपों को लगातार खारिज किया है।
बहरहाल, एंड्रयू के बड़े भाई महाराजा चार्ल्स ने मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए अपने भाई को आदेश दिया कि वह अपनी सभी शाही उपाधियां त्याग दें। यह पहली बार नहीं है, जब ब्रिटेन के शाही परिवार ने विवादों से घिरे किसी सदस्य के खिलाफ इतना कठोर कदम उठाया हो।
इतिहास गवाह है कि जब भी कोई विवाद सामने आता है, तो शाही परिवार का पूरा जोर शर्मिंदगी से बचने और संबंधित सदस्यों को मीडिया की नजरों से ओझल करने के उपायों पर केंद्रित हो जाता है। हालांकि, मशहूर हस्तियों के निजी जीवन, करियर और सार्वजनिक उपस्थिति की रिपोर्टिंग पर केंद्रित सेलेब्रिटी पत्रकारिता के दौर में यह काफी मुश्किल है।
जब जॉर्ज पंचम (1910 से 1936 तक ब्रिटेन के महाराजा) के बेटे प्रिंस जॉन के मिर्गी से पीड़ित होने की बात पता चली थी, तो उन्हें सावधानीपूर्वक लोगों की नजरों से ओझल कर दिया गया और यहां तक कि परिवार के सदस्यों को भी उनके संपर्क में रहने की अनुमति नहीं दी गई। जॉन की 14 साल की उम्र में मौत हो गई और तब तक वह सुर्खियों से पूरी तरह से गायब हो चुके थे।
टेलीविजन पर प्रसारित एक वृत्तचित्र से हुआ यह खुलासा और भी दुखद था कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के दो चचेरे भाई मानसिक रूप से विक्षिप्त थे और शाही परिवार ने उन्हें लोगों की नजरों से दूर रखने के लिए महल की चारदीवारी में कैद रखा था। हालांकि, शाही घराने ने इन दावों का पुरजोर खंडन किया है।
बहरहाल, एडवर्ड अष्टम के शाही गद्दी छोड़ने, राजकुमारी मार्गरेट को पीटर टाउनसेंड से शादी रचाने की अनुमति न दिए जाने और प्रिंस हैरी के ब्रिटेन छोड़ कैलिफोर्निया में बसने जैसे विवादों के सामने ये उदाहरण कोई मायने नहीं रखते।
उक्त सभी विवाद बेमेल शादी के इर्द-गिर्द केंद्रित थे : एडवर्ड ने उस समय सिंहासन त्याग दिया, जब उन्हें तलाकशुदा वॉलिस सिंपसन से शादी करने से रोका गया; मार्गरेट को न चाहते हुए भी टोनी आर्मस्ट्रांग-जोंस के साथ विवाह के बंधन में बंधना पड़ा और बाद में उनका तलाक भी हो गया; हैरी का ब्रिटेन छोड़ना भी अभिनय और मॉडलिंग की दुनिया से जुड़ी मेघन मार्कल से उनकी शादी का प्रत्यक्ष परिणाम था।
हालांकि, एडवर्ड को जहां सिंहासन पर रहते हुए एक तलाकशुदा महिला से शादी रचाने की अनुमति नहीं दी गई, वहीं चार्ल्स ने शाही गद्दी के उत्तराधिकार की कतार में पहले पायदान पर होने के बावजूद राजकुमारी डायना को तलाक दे दिया और एक कार हादसे में उनकी मौत के बाद कैमिला से ब्याह रचा लिया। कैमिला जिन्हें लंबे समय तक “दूसरी महिला” के रूप में तिरस्कृत किया गया, समय बीतने के साथ व्यापक रूप से स्वीकार्य रानी बन गईं।
पिछली एक शताब्दी में ब्रिटिश शाही घराने में शायद ही कोई ऐसा राजकुमार मिलेगा, जिसका आचरण एंड्रयू की तरह स्पष्ट रूप से निंदनीय और संभवतः आपराधिक है। ऐसे में यह बात अपने आप में परेशान करने वाली है कि एंड्रयू मुकदमे से बच निकले, जबकि उन्होंने खुद को लगातार बेकसूर बताने के बीच गुइफ्रे से भारी-भरकम राशि में समझौता किया था।
हैरी की तरह ही एंड्रयू को भी केवल संसद में पारित कानून के जरिये उत्तराधिकार की कतार से हटाया जा सकता है, लेकिन वह सिंहासन हासिल करने की पंक्ति में आठवें पायदान पर हैं। महाराजा चार्ल्स ने फैसला लिया है कि एंड्रयू अब अपने अन्य भाई-बहनों, ऐनी और एडवर्ड के विपरीत आधिकारिक शाही परिवार का हिस्सा नहीं होंगे।
और खुशकिस्मती यह है कि एंड्रयू को औपनिवेशिक काल की तरह गवर्नर बनने के लिए नहीं भेजा जा सकता, जैसा कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ड्यूक ऑफ विंडसर के साथ हुआ था। एंड्रयू को संभवतः विंडसर कैसल में अलग-थलग छोड़ दिया जाएगा। उन्हें पारिवारिक समारोहों से दूर रखा जाएगा, जिन्हें मीडिया में बड़े पैमाने पर कवरेज मिलती है।
हालांकि, एंड्रयू और सारा के जीवनयापन पर ब्रिटिश करदाताओं से जुटाई गई धनराशि खर्च किए जाने के संबंध में शाही घराने को कठिन सवालों का सामना करना पड़ सकता है, जो एक आलीशान महल में नौकरों की फौज के बीच रहते हैं।
क्या एंड्रयू से जुड़ा विवाद ब्रिटिश शाही घराने की साख को प्रभावित करेगा? संभवत: नहीं, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया की तरह ही ब्रिटेन में भी संवैधानिक राजतंत्र की व्यवस्था को समाप्त करने को लेकर उत्साह कम होता दिख रहा है। लोग एंड्रयू के प्रति आक्रोश को राजशाही के प्रति सम्मान से अलग रख सकते हैं, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जैसे ‘लोकप्रिय अधिनायक’ के उदय से मदद मिलती है।
जब ट्रंप पिछले महीने ब्रिटेन पहुंचे थे, तो वह चार्ल्स के मेहमान थे, जिन्होंने राष्ट्र प्रमुख के रूप में अपनी भूमिका का इस्तेमाल अमेरिकी राष्ट्रपति को लुभाने के लिए किया।
(द कन्वरसेशन) पारुल मनीषा
मनीषा