ईरान और अमेरिका के हमले तेज; तेहरान ने बहरीन, जॉर्डन और तेल टैंकरों को निशाना बनाया

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ईरान और अमेरिका के हमले तेज; तेहरान ने बहरीन, जॉर्डन और तेल टैंकरों को निशाना बनाया

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  • Publish Date - July 14, 2026 / 10:59 PM IST,
    Updated On - July 14, 2026 / 10:59 PM IST

दुबई, 14 जुलाई (एपी) अमेरिका ने मंगलवार तड़के ईरान पर हवाई हमले किए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी फिर से लागू करने और होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने की घोषणा के कुछ घंटे बाद ये हमले किये गए।

अमेरिकी सैन्य हमले के जवाब में ईरान ने पश्चिम एशिया में अमेरिका के सहयोगियों पर हमला कर पलटवार किया।

इन कार्रवाइयों से उस अंतरिम समझौते पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, जिसका उद्देश्य संघर्ष को रोकना, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से खोलना और वार्ताकारों को युद्ध के स्थायी अंत के लिए तौर-तरीके तय करने का समय देना था।

इसके बजाय, क्षेत्र में एक बार फिर संघर्ष भड़क उठा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा मंडराने लगा है। यदि जल्द ही कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया, तो यह स्थिति एक व्यापक युद्ध में बदल सकती है।

अब इस संघर्ष का मुख्य केंद्र यह (होर्मुज) जलडमरूमध्य बन गया है, जहां से सामान्य दिनों में दुनिया के कुल व्यापार वाले कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का पांचवां हिस्सा गुज़रता था।

अंतरिम समझौते का उद्देश्य इस जलमार्ग को फिर से खोलना था, लेकिन ईरान ने जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कुछ जहाजों पर हमले किए हैं।

अमेरिका ने अब बलपूर्वक इस जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की धमकी दी है—लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए एक बहुत बड़े नौसैनिक बेड़े की आवश्यकता होगी, और यदि ऐसा नहीं हुआ तो ईरानी धरती पर हजारों अमेरिकी सैनिकों को उतारना पड़ेगा। हालांकि, यह भी संभव है कि ट्रंप अपने कदम पीछे खींच लें, जैसा कि उन्होंने पहले भी किया है।

अमेरिकी सेना की केंद्रीय कमान ने कहा कि उसने ईरान के कई इलाकों में हमले किए हैं। इन हमलों में ‘तटीय रक्षा प्रणालियों, मिसाइल और ड्रोन ठिकानों तथा समुद्री क्षमताओं’’ को निशाना बनाया गया।

ईरान ने इन हमलों की पुष्टि तो की है, लेकिन फिलहाल हताहतों की संख्या या नुकसान का कोई आकलन जारी नहीं किया।

अमेरिकी सेना ने कहा, ‘‘ये हमले ईरानी बलों को भारी नुकसान पहुंचाना जारी रखेंगे और होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्दोष नागरिकों तथा व्यावसायिक जहाजों पर हमला करने की उनकी क्षमता को कमज़ोर कर देंगे।’’

इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, जॉर्डन और उन तीन तेल टैंकरों को निशाना बनाया, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजर रहे थे।

इनमें से दो जहाज संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से संबद्ध थे और उनमें आग लग गई। संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि ‘मोम्बासा’ और ‘अल बहिया’ नामक तेल टैंकरों पर हमले में एक नाविक की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य घायल हुए हैं।

संयुक्त अरब अमीरात ने इस हमले का जवाब देने की चेतावनी दी है।

बाद में डच नौवहन कंपनी ‘स्टोल्ट टैंकर्स’ ने बताया कि उसका एक जहाज अरब सागर में ओमान के तट के पास हमले की चपेट में आ गया।

हमले के कारण ‘स्टोल्ट मैग्नीशियम’ जहाज के इंजन कक्ष में आग लग गई, लेकिन कंपनी ने कहा कि जहाज पर मौजूद सभी नाविक सुरक्षित हैं और उनकी स्थिति की पुष्टि कर ली गई है।

ईरान के अर्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि मोम्बासा और अल बहिया जहाजों ने ‘बार-बार दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज किया।’

ईरान ने उन जहाजों को निशाना बनाया है, जो जलडमरूमध्य के उस मार्ग से गुजरते हैं जो ओमान के पास से होकर गुजरता है और ईरान के क्षेत्रीय जल क्षेत्र से बाहर है।

अमेरिका द्वारा अपने हमले का अभियान खत्म करने की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही फारस की खाड़ी में स्थित ईरान के बुशेहर शहर में कम से कम चार जगहों पर हमले हुए। सरकारी समाचार एजेंसी इरना ने इसकी जानकारी दी।

इन हमलों के बाद एक बार फिर यह आशंका बढ़ गई कि खाड़ी क्षेत्र के अरब देश जवाबी कार्रवाई के तौर पर ईरान को निशाना बना रहे हैं।

जॉर्डन की सेना ने अलग से कहा कि उसने ईरान की ओर से दागी गई चार मिसाइलों को रोक दिया। जॉर्डन में भी अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं और हाल के दिनों में वह ईरान के हमलों का निशाना बन चुका है।

यूरोपीय संघ विमानन सुरक्षा एजेंसी ने एयरलाइनों को बहरीन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात के हवाई क्षेत्र के साथ-साथ ओमान की खाड़ी के ऊपर से उड़ान भरने से बचने की चेतावनी दी है।

हाल के दिनों में हुए हमलों और जवाबी कार्रवाइयों ने पहले ही इस अंतरिम शांति समझौते पर सवाल खड़े कर दिए थे। यह समझौता अब अपनी 60 दिन की अवधि के लगभग आधे पड़ाव पर पहुंच चुका है, जिसके दौरान वार्ताकारों को एक अंतिम समझौते पर सहमति बनानी थी। इस समझौते में ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम और अन्य मुद्दों को भी शामिल किया जाना था।

लेकिन ट्रंप द्वारा नाकेबंदी लागू करने की घोषणा ने इस समझौते को और खतरे में डाल दिया है। समझौते के तहत अमेरिका ने अप्रैल के मध्य में लगाई गई अपनी नाकेबंदी को हटा लिया था। अब अमेरिकी सेना ने कहा है कि वह दुबई के समयानुसार आधी रात से इसे फिर से लागू करेगी।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा, ‘‘हम ईरान पर नाकेबंदी को फिर से लागू कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि अन्य सभी देशों को जलडमरूमध्य के इस्तेमाल की उचित और खुली सुविधा मिलेगी।

हालांकि, राष्ट्रपति ने कहा कि अन्य जहाजों की सुरक्षा के लिए अमेरिका शुल्क लगाएगा। उन्होंने कहा कि यह शुल्क जहाज पर लदे माल के कुल मूल्य का 20 प्रतिशत होगा, ताकि ‘‘सुरक्षा और संरक्षा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक सभी खर्चों’’ को पूरा किया जा सके।

दो क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्रीय मध्यस्थ अब भी अमेरिका और ईरान को दोबारा बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। अधिकारियों ने अपनी पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा कि युद्धविराम के लिए पाकिस्तान की अगुवाई में मध्यस्थता के प्रयास चल रहे हैं।

अमेरिका की मध्यस्थता में चल रही बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए लेबनान और इजराइल के प्रतिनिधिमंडलों के मंगलवार को रोम में मिलने की उम्मीद थी।

एपी राजकुमार वैभव

वैभव