ईरान ने शांति वार्ता में गतिरोध तोड़ने के लिए अमेरिका को नया प्रस्ताव भेजा

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ईरान ने शांति वार्ता में गतिरोध तोड़ने के लिए अमेरिका को नया प्रस्ताव भेजा

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  • Publish Date - May 3, 2026 / 05:17 PM IST,
    Updated On - May 3, 2026 / 05:17 PM IST

(एम. जुल्करनैन)

लाहौर, तीन मई (भाषा) ईरान ने शांति वार्ता में गतिरोध तोड़ने के लिए वाशिंगटन को “बहु-स्तरीय प्रस्ताव” भेजा है। इस घटनाक्रम से अवगत एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी।

हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के नए प्रस्ताव से अभी संतुष्ट नहीं हैं।

उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका किसी ऐसे प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेगा जिसमें तेहरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने की ठोस गारंटी शामिल न हो।

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमले किए थे, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच युद्ध शुरू हो गया था। हालांकि, यह संघर्ष आठ अप्रैल से रुका हुआ है। इस दौरान पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में एक दौर की शांति वार्ता हो चुकी है।

पाकिस्तानी अधिकारी के अनुसार, ईरान का नया प्रस्ताव तनाव को चरणबद्ध तरीके से कम करने पर आधारित है, जिसमें उसके परमाणु कार्यक्रम से जुड़े जटिल मुद्दों को अलग-अलग रखने की कोशिश की गई है।

प्रस्ताव के तीन प्रमुख हिस्से हैं। पहला हिस्सा तत्काल तनाव कम करने के उपायों पर केंद्रित है। ईरान ने संकेत दिया है कि वह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव कम करने को तैयार है, बशर्ते अमेरिका भी अपनी सैन्य मौजूदगी कम करे और आर्थिक दबाव-खासतौर पर ईरानी तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में ढील दे।

दूसरा हिस्सा समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति को परमाणु वार्ता से अलग करने से जुड़ा है। ईरान का तर्क है कि आर्थिक सामान्यीकरण पहले होना चाहिए, उसके बाद ही परमाणु गतिविधियों पर किसी बाध्यकारी समझौते पर बात होनी चाहिए।

तीसरा हिस्सा परमाणु मुद्दे पर “सशर्त लचीलेपन” से संबंधित है।

ईरान ने परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के अपने अधिकार को दोहराते हुए यूरेनियम संवर्धन की सीमा और कड़े निगरानी तंत्र पर चर्चा की इच्छा जताई है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यह तभी संभव होगा जब व्यापक समझौते के तहत प्रतिबंधों से राहत सुनिश्चित की जाए।

वहीं, ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मैं फिलहाल उनके प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हूं। वे ऐसी चीजें मांग रहे हैं जिनसे मैं सहमत नहीं हो सकता।”

उन्होंने यह भी कहा कि विकल्प या तो समझौता करना है या फिर बड़ा सैन्य कदम उठाना। हालांकि उन्होंने बड़े हमले से बचने की इच्छा जताई।

वहीं, ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम गरीबाबादी ने कहा कि अब फैसला अमेरिका को करना है कि वह कूटनीति का रास्ता अपनाता है या टकराव जारी रखता है।

उन्होंने कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दोनों विकल्पों के लिए तैयार है।

गौरतलब है कि 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई पहली प्रत्यक्ष वार्ता में दोनों पक्ष युद्ध खत्म करने पर सहमत नहीं हो सके थे। पिछले सप्ताह ट्रंप ने युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया था ताकि ईरान को व्यापक प्रस्ताव तैयार करने का समय मिल सके।

भाषा जोहेब नेत्रपाल

नेत्रपाल