युद्ध में विरासत का नष्ट होना महिलाओं के लिए स्मारक के नुकसान से कहीं अधिक: नया शोध

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युद्ध में विरासत का नष्ट होना महिलाओं के लिए स्मारक के नुकसान से कहीं अधिक: नया शोध

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  • Publish Date - May 25, 2026 / 12:26 PM IST,
    Updated On - May 25, 2026 / 12:26 PM IST

(बेंजामिन इसाखान और एलेनोर चाइल्ड्स, डीकिन विश्वविद्यालय)

विक्टोरिया (ऑस्ट्रेलिया), 25 मई (द कन्वरसेशन) यूक्रेन, गाजा, ईरान और दुनिया के अन्य हिस्सों में संघर्ष जारी है। इसकी कीमत केवल मौतों और विस्थापन के रूप में नहीं चुकाई जा रही, बल्कि पुस्तकालयों, मस्जिदों, गिरजाघरों, संग्रहालयों, अभिलेखागारों और ऐतिहासिक मोहल्लों के क्षतिग्रस्त होने के रूप में भी दर्ज हो रही है।

यूनेस्को ने पुष्टि की है कि रूस के व्यापक आक्रमण के बाद से यूक्रेन में 527 सांस्कृतिक स्थलों को नुकसान पहुंचा है। सात अक्टूबर 2023 के बाद गाजा में 164 सांस्कृतिक स्थल प्रभावित हुए हैं। वहीं, विश्व धरोहर सूची में शामिल तेहरान स्थित गोलेस्तान पैलेस को पास में हुए हवाई हमले के कारण क्षति पहुंची।

ऐसे नुकसान को अक्सर “इतिहास”, “सभ्यता” या “अतीत” पर हमला कहा जाता है और कभी-कभी इसे “पूरी मानवता की क्षति” भी बताया जाता है।

लेकिन हमारे नए शोध के अनुसार, इस तरह का विनाश केवल इमारतों को नहीं मिटाता, बल्कि समुदायों की पहचान और अपनेपन की भावना को भी गहरा आघात पहुंचाता है। संघर्ष के बीच यह महिलाओं की सुरक्षा और भरोसे की भावना को भी कमजोर कर देता है।

‘इस्लामिक स्टेट’ की हिंसा

‘इस्लामिक स्टेट’ ने 2013 से सीरिया और इराक में अपने अभियान के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा, मानवाधिकार उल्लंघन और लोगों के जबरन विस्थापन को अंजाम दिया। इस संगठन ने यजीदी अल्पसंख्यकों के खिलाफ नरसंहार किया, जिसमें हत्याएं और यौन दासता जैसी क्रूरताएं शामिल रहीं।

इसी दौरान ‘इस्लामिक स्टेट’ ने सुनियोजित तरीके से सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को निशाना बनाया। संग्रहालयों, पुरातात्विक स्थलों, चर्चों, दरगाहों, कब्रिस्तानों, मस्जिदों और अन्य ऐतिहासिक तथा पवित्र स्थलों को तबाह किया गया।

यूनेस्को ने इसे “सांस्कृतिक विनाश” कहा था। इसका मकसद सांस्कृतिक विविधता को मिटाना था। लोगों को उनकी सांस्कृतिक, जातीय और धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया गया और साथ ही उनके प्रमुख धार्मिक व सांस्कृतिक केंद्रों पर हमले किए गए।

हमने ‘इस्लामिक स्टेट’ के हमलों से प्रभावित सीरिया और इराक की महिलाओं से बातचीत की, जहां इस संगठन ने विरासत स्थलों को निशाना बनाया। हमने पाया कि उनके लिए यह केवल सांस्कृतिक नुकसान नहीं था, बल्कि लैंगिक हिंसा का भी एक रूप था।

जिन महिलाओं से हमने बात की, उनके लिए विरासत स्थलों का विनाश एक व्यापक दमनकारी अभियान का हिस्सा था- उनकी यादों, पहचान और निजी सुरक्षा पर हमले के रूप में।

विरासत विनाश पर वैश्विक प्रतिक्रिया

‘इस्लामिक स्टेट’ के हमलों के बाद विरासत संरक्षण को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं तेज हुईं।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने 2016 में देशों से कहा कि वे हर व्यक्ति के सांस्कृतिक जीवन में भागीदारी के अधिकार की रक्षा करें, जिसमें सांस्कृतिक विरासत तक पहुंच और उसके भ्रमण का अधिकार भी शामिल है।

उसी वर्ष अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने माली के टिंबकटू में ऐतिहासिक और धार्मिक इमारतों पर जानबूझकर हमले करने के ‘युद्ध अपराध’ में एक शीर्ष आतंकवादी को दोषी ठहराया।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 2017 में सांस्कृतिक विरासत के इस विनाश की निंदा करते हुए इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा माना।

इन घटनाओं ने विरासतों के विनाश को केवल संरक्षण से जुड़े मुद्दे के बजाय मानवाधिकार, आपराधिक जवाबदेही और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के प्रश्न के रूप में स्थापित किया।

लेकिन इन चर्चाओं में यह लगभग गायब ही रहा कि महिलाएं इस विनाश को किस तरह अलग और लैंगिक अनुभव के रूप में महसूस करती हैं।

महिलाओं ने क्या बताया?

जिन महिलाओं का हमने साक्षात्कार लिया, उनके लिए विरासत स्थल केवल अराधना स्थल या अतीत के प्रतीक नहीं थे। वे ऐसे स्थान भी थे, जहां महिलाएं एक-दूसरे से मिलतीं, सहारा देतीं और सामाजिक रिश्तों को बनाए रखती थीं।

कई महिलाओं ने गिरजाघरों, मस्जिदों और दरगाहों को ऐसी जगह बताया, जहां वे दूसरी महिलाओं के साथ अपने “सुख-दुख” साझा कर सकती थीं।

ये स्थल महिलाओं को ऐसे सामाजिक दायरे उपलब्ध कराते थे, जहां प्रेम संबंध, विवाह और मातृत्व जैसे जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर बातचीत और सहयोग संभव होता था।

जब ये स्थान नष्ट होते हैं, तो केवल स्थापत्य क्षति नहीं होती। इसके साथ महिलाओं के आपसी सहयोग और भावनात्मक सहारे के स्थान भी खत्म हो जाते हैं।

एक यजीदी महिला ने तीर्थस्थलों को आध्यात्मिक केंद्र बताया, जहां लोग अपने मृतकों को दफनाते, उनसे जुड़ी रस्में निभाते, प्रार्थना करते और सामुदायिक आयोजन करते थे। इन स्थानों के विनाश ने शोक मनाने, अराधना करने और परंपराओं को जीवित रखने की प्रक्रियाओं को तोड़ दिया।

कुछ महिलाओं ने इस क्षति को बेहद निजी अनुभव के रूप में याद किया। एक ईसाई महिला ने उस चर्च के नष्ट होने का जिक्र किया, जहां उसके परिवार के सदस्यों का ‘बपतिस्मा’ हुआ था और जहां उसकी शादी हुई थी। वहीं, एक सुन्नी महिला ने मस्जिद के विनाश को “भीतर तक झकझोर देने वाला’’ बताया।

सांस्कृतिक विनाश लोगों पर हमला करने का एक तरीका बन सकता है, क्योंकि इससे वे स्थान मिट जाते हैं जो उनके जीवन, रिश्तों और सुरक्षा की भावना को सहारा देते हैं।

हमने जिन महिलाओं से बातचीत की, उन्होंने विरासत विनाश को भय, विस्थापन और अविश्वास से जोड़ा। एक महिला ने कहा कि विरासत स्थलों को टूटते देख उन्हें अपने ही शहर में असुरक्षित महसूस होने लगा। दूसरी महिला ने कहा कि इस विनाश ने उन्हें इतना डरा दिया कि अपना घर और नौकरी छोड़कर जॉर्डन जाना पड़ा।

अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं के लिए यह असर और भी गहरा था। एक यजीदी महिला ने कहा कि उसके समुदाय ने इस्लामी समुदाय पर “भरोसा खो दिया” और अब वे उनके बीच रहना सुरक्षित नहीं मानते।

उनके लिए यजीदी समुदाय से जुड़ी चीजों का विनाश स्थायी “असुरक्षा”, चिंता और इस भय का कारण बन गया कि ऐसी हिंसा फिर दोहराई जा सकती है।

स्मारकों से कहीं बड़ा नुकसान

ये निष्कर्ष केवल सीरिया और इराक तक सीमित नहीं हैं। यूक्रेन, गाजा, ईरान और अन्य संघर्षग्रस्त इलाकों में विरासत संरक्षण को मानव सुरक्षा के बाद की विलासिता नहीं माना जाना चाहिए।

विरासत स्थल केवल पुरानी इमारतें नहीं होते। वे शोक मनाने, प्रार्थना करने, मिलने-जुलने, शिक्षा पाने, यादों को संजोने और संघर्ष के बाद जीवन को फिर से खड़ा करने के केंद्र होते हैं।

विरासत विनाश को केवल “इतिहास” या “मानवता” की क्षति कहने के बजाय यह समझना जरूरी है कि इसका असर उन लोगों पर क्या पड़ता है जो इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।

यह स्थान किसके जीवन का हिस्सा था? यहां किसकी यादें और संस्कृति बसती थीं? किसे यहां सुरक्षित महसूस होता था? और जब यह सब अचानक छिन जाता है, तो लोगों पर क्या गुजरती है?

युद्ध से प्रभावित अनेक महिलाओं के लिए, जब विरासत नष्ट होती है तो वे केवल स्मारक नहीं खोतीं, वे अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण सहारा भी खो देती हैं।

द कन्वरसेशन

खारी वैभव

वैभव