मक्का (सऊदी अरब), 25 मई (एपी) इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक मानी जाने वाली वार्षिक हज यात्रा सोमवार को आधिकारिक रूप से शुरू हो गई।
हज पासपोर्ट बलों के कमांडर सालेह बिन साद अल-मुरब्बा ने शुक्रवार को बताया कि विदेशों से 15 लाख से अधिक जायरीन सऊदी अरब पहुंच चुके हैं। ईरान युद्ध के नाजुक संघर्ष विराम और युद्ध से जुड़े क्षेत्रीय तनाव एवं अनिश्चितता के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु हज के लिए सऊदी अरब पहुंच रहे हैं।
मिस्र की जायरीन साम्या अब्दुल मोनीम ने कहा कि वह अल्लाह की शुक्रगुजार हैं कि उन्हें हज पर आने का मौका मिला।
हर उस मुसलमान के लिए जीवन में एक बार हज करना जरूरी माना जाता है जो इसका खर्च उठा सकता हो और शारीरिक रूप से सक्षम हो।
मोनीम ने रविवार को मक्का में कहा, ‘‘मैं बहुत खुश हूं। यह अहसास बयान नहीं किया जा सकता। अल्लाह का शुक्र है कि मुझे यह नेमन मिली।’’
भीषण गर्मी के बीच यात्रा कर रहे जायरीनों के हाथों में छाते और हाथ से चलने वाले पंखे देखे जा सकते हैं। स्वयंसेवक उन्हें पानी की बोतलें बांट रहे हैं और बड़े पंखों से पानी की फुहारें भी छोड़ी जा रही हैं।
भारत में बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी है और वहां हज यात्रा की तैयारी काफी हद तक सामान्य तरीके से आगे बढ़ी है लेकिन ईंधन की ऊंची कीमतों के कारण जायरीन की यात्रा लागत बढ़ गई है।
सऊदी अरब में जायरीन मक्का पहुंचने के बाद काबा की परिक्रमा कर रहे हैं। बाद में जायरीन तंबुओं के शहर मीना में रुकेंगे और इबादत करेंगे।
मंगलवार को हज यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। इस दिन जायरीन अराफात के मैदान में ठहरेंगे जहां वे अल्लाह की बंदगी करेंगे, उससे माफी और दुआएं करेंगे।
एपी सिम्मी रंजन
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