(शिरीष बी प्रधान)
काठमांडू, तीन मई (भाषा) नेपाल ने रविवार को भारत और चीन द्वारा लिपुलेख दर्रे के रास्ते आगामी कैलाश मानसरोवर यात्रा आयोजित करने की योजना पर आपत्ति जताई और दावा किया कि यह उसका क्षेत्र है।
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि तीर्थयात्रा के मार्ग को अंतिम रूप देने से पहले काठमांडू से परामर्श नहीं किया गया।
नयी दिल्ली का यह निरंतर कहना रहा है कि कि लिपुलेख भारत का हिस्सा है।
नेपाल ने कैलाश मानसरोवर यात्रा पर आपत्ति उस वक्त जताई जब भारत ने यह यात्रा जून और अगस्त के बीच आयोजित किये जाने की घोषणा की।
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में कहा, ‘‘नेपाल सरकार अपने इस रुख पर पूरी तरह से कायम है कि महाकाली नदी के पूर्व में स्थित लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी, 1816 की सुगौली संधि के आधार पर उसके अविभाज्य क्षेत्र हैं।’’
इसमें कहा गया है, ‘‘नेपाल सरकार ने भारत और चीन दोनों के समक्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा के संबंध में अपना स्पष्ट रुख दोहराया है, जिसे नेपाली क्षेत्र लिपुलेख के रास्ते आयोजित किया जाना है।’’
बयान के मुताबिक, इससे पहले भी नेपाल सरकार ने भारत सरकार से इस क्षेत्र में सड़क निर्माण, विस्तार, सीमा व्यापार और तीर्थयात्रा जैसी गतिविधियों को न करने का अनुरोध किया था।
बयान में यह भी कहा गया है कि नेपाल सरकार ने इस बारे में चीन को भी सूचित कर दिया है।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘नेपाल और भारत के बीच घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंधों को देखते हुए, नेपाल सरकार ऐतिहासिक समझौते, तथ्यों, नक्शों और सबूतों के आधार पर राजनयिक माध्यम से सीमा मुद्दे को हल करने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है।’’
नेपाल का दावा है कि लिपुलेख और कालापानी उसके क्षेत्र हैं, जबकि नयी दिल्ली का कहना है कि ये क्षेत्र भारत के हैं।
नेपाल की के.पी. शर्मा ओली के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार ने मई 2020 में कालापानी और लिपुलेख सहित इन क्षेत्रों को अपने आधिकारिक नक्शे में शामिल किया।
यह कदम भारत द्वारा धारचूला को लिपुलेख दर्रे से जोड़ने वाली 80 किलोमीटर लंबी सड़क के उद्घाटन के बाद उठाया गया था, जो तिब्बत में कैलाश मानसरोवर तीर्थस्थल का मार्ग है। नेपाल ने इस सड़क के उद्घाटन का विरोध करते हुए इसे भारत का ‘‘एकतरफा कृत्य’’ बताया था।
भारत के विदेश मंत्रालय ने 30 अप्रैल को घोषणा की कि वार्षिक कैलाश मानसरोवर यात्रा इस वर्ष जून से अगस्त तक दो मार्गों – उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रा और सिक्किम में नाथू ला दर्रा – के रास्ते होगी।
भाषा शफीक सुभाष
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