Nepal Rescue Operation: मौत के साए में बीते 10 दिन, फिर टनल के अंदर से आई आवाज ने जगा दी उम्मीद, नेपाल में त्रासदी के 9 दिन बाद हुआ ऐसा चमत्कार

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Nepal Rescue Operation: मौत के साए में बीते 10 दिन, फिर टनल के अंदर से आई आवाज ने जगा दी उम्मीद, नेपाल में त्रासदी के 9 दिन बाद हुआ ऐसा चमत्कार

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  • Publish Date - September 4, 2026 / 01:39 PM IST,
    Updated On - September 4, 2026 / 01:40 PM IST

Nepal Rescue Operation | Photo Credit: IBC24

HIGHLIGHTS
  • बाढ़ में फंसे थे दो लोग
  • 10 दिन बाद सुरंग के अंदर से आई आवाज
  • ऐसे हुआ चमत्कारिक रेस्क्यू

काठमांडू: Nepal Rescue Operation नेपाल की भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ के दस दिन बाद त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग से दो लोगों को बचाया गया है। (Nepal flood news) दोनों व्यक्तियों की पहचान कबीर महार्जन (45) और संजय साह (30) के रूप में हुई है। (Nepal rescue operation) नेपाल सेना के जनसंपर्क निदेशालय के अनुसार महार्जन इस परियोजना पर एक यांत्रिक पर्यवेक्षक के रूप में काम कर रहे थे जबकि साह ‘फोरमैन’ के रूप में कार्यरत थे।

आवाजें सुनने के बाद चलाया बचाव अभियान

Nepal Rescue Operation नेपाल सेना के नेतृत्व में सुरक्षा कमान विशेष उपकरणों की मदद से तलाश और बचाव अभियान में जुटी हुई है। समाचार पत्र ‘काठमांडू पोस्ट’ की खबर के अनुसार इससे पहले बचावकर्मियों ने सुरंग के अंदर से आवाजें सुनने के बाद वहां फंसे लोगों से संपर्क स्थापित किया और फिर यह बचाव अभियान चलाया गया। इसमें बताया गया कि आवाजें सुनने के बाद नेपाल की सेना और सशस्त्र पुलिस बल ने उन तक पहुंचने की कोशिशें तेज कर दीं।

अबतक 1,282 लोगों की मौत

नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट 26 अगस्त को बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन के कारण आई इस बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। नेपाल पुलिस के अनुसार, अब तक चितवन में 359, नवलपरासी पूर्व में 218, नवलपरासी पश्चिम में 208, नुवाकोट में 185, गोरखा में 72, धादिंग में 60, रसुवा में 140 और तनहुं में 38 शव बरामद किए गए हैं। वहीं, काठमांडू के दो अस्पतालों में इलाज के दौरान दो लोगों की मौत होने से मृतकों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 1,282 हो गई है।

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कबीर महार्जन और संजय साह कौन हैं?

त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना में क्रमशः यांत्रिक पर्यवेक्षक और फोरमैन।

उन्हें कैसे बचाया गया?

सुरंग से आवाजें सुनने के बाद नेपाल सेना ने विशेष उपकरणों की मदद से संपर्क कर बचाव किया।

बाढ़ कब आई थी?

26 अगस्त 2026 को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमस्खलन के कारण।