‘स्टेरॉयड ओलंपिक’ शुरू, खिलाड़ियों और आम लोगों के स्वास्थ्य पर खतरे की आशंका

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‘स्टेरॉयड ओलंपिक’ शुरू, खिलाड़ियों और आम लोगों के स्वास्थ्य पर खतरे की आशंका

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  • Publish Date - May 25, 2026 / 12:37 PM IST,
    Updated On - May 25, 2026 / 12:37 PM IST

( सैमुएल कॉर्नेल एवं टिमोथी पियात्कोव्स्की – यूनिवर्सिटी ऑफ क्वीन्सलैंड एवं ल्यूक कॉक्स – स्वानसी यूनिवर्सिटी )

ब्रिस्बेन, 25 मई (द कन्वरसेशन) तथाकथित ‘स्टेरॉयड ओलंपिक’ कहे जाने वाले ‘एन्हांस्ड गेम्स’ की शुरुआत लास वेगास में हो गई है और इसे दवाओं के जरिए प्रदर्शन अच्छा करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने वाले एक अनोखे आयोजन के रूप में देखा जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) ने इस आयोजन की आलोचना करते हुए इसे ‘‘ईमानदारी से खेलने की अवधारणा को नष्ट करने वाला’’ और ‘‘मूर्खतापूर्ण’’ बताया है।

इसके बावजूद यह खेल कई खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को आकर्षित कर रहे हैं।

हमारे हालिया अध्ययन में आयोजकों के कई दावों का विश्लेषण किया गया, जिनमें यह शामिल है कि : –

(1) डोपिंग खेलों की अनिवार्य प्रगति है,

(2) खिलाड़ियों को अपने शरीर के संबंध में निर्णय लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए,

(3) कई खिलाड़ी पहले से ही प्रदर्शन बढ़ाने वाली दवाओं (पीईडी) का इस्तेमाल करते हैं,

(4) बढ़ती उम्र एक ‘‘बीमारी’’ है, जिसे पीईडी के जरिए दूर किया जा सकता है।

एन्हांस्ड गेम्स में 42 खिलाड़ी तैराकी, स्प्रिंट, वेटलिफ्टिंग और स्ट्रॉन्गमैन प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगे। विश्व रिकॉर्ड तोड़ने पर खिलाड़ियों को 10 लाख अमेरिकी डॉलर तक की इनामी राशि मिल सकती है। ये रिकॉर्ड पहले उन खिलाड़ियों द्वारा बनाए गए थे, जिन्होंने डोपिंग जांच के तहत प्रतिस्पर्धा की थी।

प्रतियोगिता में शामिल खिलाड़ियों में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व 100 मीटर फ्रीस्टाइल विश्व चैंपियन जेम्स मैग्नसन, अमेरिका के 2022 विश्व 100 मीटर स्प्रिंट चैंपियन फ्रेड कर्ली और पेरिस ओलंपिक में 50 मीटर फ्रीस्टाइल में रजत पदक जीतने वाले ब्रिटेन के बेन प्राउड शामिल हैं।

मुख्यधारा के खेलों से अलग, एन्हांस्ड गेम्स में भाग लेने वाले खिलाड़ी अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) से स्वीकृत, प्रदर्शन को बेहतर करने वाले पदार्थों का इस्तेमाल कर सकते हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत चिकित्सकीय निगरानी में टेस्टोस्टेरोन, ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन और एरिथ्रोपोइटिन (ईपीओ) जैसी दवाओं के उपयोग की अनुमति है। इसके साथ प्रतियोगिता से पहले स्वास्थ्य जांच और प्रोफाइलिंग भी की जाएगी।

इस आयोजन के दौरान बने रिकॉर्ड को अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघ मान्यता नहीं देंगे, क्योंकि ये महासंघ डोपिंग रोधी नियमों और जांच प्रणाली को लागू करते हैं। ऐसे में रिकॉर्ड केवल एन्हांस्ड गेम्स के दायरे में ही मान्य माने जाएंगे और शायद उन लोगों के बीच भी, जो इसे वैध मानते हैं।

‘जर्नल ऑफ ड्रग इश्यूज’ में स्वीकृत हमारे नए शोधपत्र में एन्हांस्ड गेम्स के संस्थापक और ऑस्ट्रेलियाई तकनीकी उद्यमी एरॉन डी’सूजा के 13 प्रमुख यूट्यूब साक्षात्कारों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में पाया गया कि डी’सूजा लगातार कुछ ऐसे तर्क देते हैं, जिनका उद्देश्य डोपिंग रोधी नीतियों को अस्थिर करना, पीईडी के उपयोग को सही ठहराना और आयोजन को वैधता देना है।

पहला तर्क यह है कि सभी शीर्ष खिलाड़ी डोपिंग के आदी हैं और साफ-सुथरे खेल केवल एक मिथक है। डी’सूजा अक्सर एक अध्ययन का हवाला देते हैं, जिसमें दावा किया गया है कि 40 प्रतिशत या उससे अधिक शीर्ष खिलाड़ी पीईडी का इस्तेमाल करते हैं, जबकि केवल लगभग दो प्रतिशत खिलाड़ी ही पकड़े जाते हैं। इसी आधार पर डी’सूजा डोपिंग रोधी व्यवस्था की विफलताओं को उजागर करते हुए नए दृष्टिकोण की वकालत करते हैं।

दूसरा तर्क खिलाड़ियों की शारीरिक स्वतंत्रता पर आधारित है। डी’सूजा का कहना है कि खिलाड़ियों को अपने शरीर के बारे में फैसला लेने की आजादी होनी चाहिए।

हालांकि अध्ययन में कहा गया कि एन्हांस्ड गेम्स में यह स्वतंत्रता वास्तविक नहीं दिखती। स्वास्थ्य मानकों की निगरानी के लिए अनिवार्य रक्त परीक्षण किए जाते हैं, जिससे खिलाड़ियों की पसंद सीमित हो जाती है।

इसके अलावा खिलाड़ियों को दवा संबंधी प्रोटोकॉल दिए जाते हैं, जिनमें बताया जाता है कि कौन-सी दवाएं, कितनी मात्रा में और कितने समय तक इस्तेमाल की जा सकती हैं। अध्ययन के अनुसार यह स्वतंत्रता नहीं बल्कि नियंत्रण का एक रूप है।

इसके अलावा खिलाड़ियों को केवल भाग लेने के लिए ही छह अंकों तक का भुगतान किया जा रहा है, जिससे ‘‘स्वतंत्र निर्णय’’ की अवधारणा और धुंधली हो जाती है।

डोपिंग रोधी व्यवस्था को खारिज करने के लिए दिए गए तीसरे तर्क में डी’सूजा दावा करते हैं कि सामान्य खेलों में खिलाड़ी चिकित्सकीय छूट (थैरेप्यूटिक यूज एग्जेम्प्शन) के नाम पर प्रतिबंधित दवाओं का इस्तेमाल करते हैं।

हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि डी’सूजा द्वारा पेश किए गए आंकड़े चयनात्मक हैं। वे उस अध्ययन को नजरअंदाज करते हैं, जिसमें पाया गया कि ओलंपिक खेलों में वैध चिकित्सकीय छूट के साथ प्रतिस्पर्धा करने वाले खिलाड़ियों की संख्या एक प्रतिशत से भी कम थी और छूट मिलने तथा पदक जीतने के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया।

फिर भी ऐसे दावे प्रभावशाली साबित होते हैं और सोशल मीडिया पर तेजी से फैलते हैं।

डी’सूजा का यह भी कहना है कि यह आयोजन पीईडी के उपयोग से जुड़ी ‘‘नकारात्मक धारणा’’ को खत्म करेगा। शोधकर्ताओं के अनुसार नुकसान कम करने के दृष्टिकोण से यह सकारात्मक हो सकता है, लेकिन इससे पीईडी इस्तेमाल करने वालों की संख्या भी बढ़ सकती है।

डी’सूजा यह भी दावा करते हैं कि बढ़ती उम्र एक ‘‘बीमारी’’ है, जिसे पीईडी के जरिए रोका जा सकता है। हालांकि अध्ययन में कहा गया कि एन्हांस्ड गेम्स के आयोजक और प्रायोजक सीधे तौर पर टेस्टोस्टेरोन, पेप्टाइड और लंबी उम्र से जुड़े उत्पादों का प्रचार और बिक्री कर रहे हैं, जिससे हितों के टकराव की स्थिति पैदा होती है।

सोशल मीडिया से आगे बढ़कर एन्हांस्ड गेम्स को कई धनी और प्रभावशाली लोगों का समर्थन मिला हुआ है। इनमें डोनाल्ड ट्रंप जूनियर की निवेश फर्म ‘1789 कैपिटल’ और ‘पलांटिर टेक्नोलॉजीज’ के सह-संस्थापक एवं अरबपति कारोबारी पीटर थिएल शामिल हैं।

ऐसा भी प्रतीत होता है कि आयोजन को राजनीतिक समर्थन प्राप्त है। 2026 में रॉबर्ट एफ. केनेडी जूनियर के नेतृत्व में एफडीए ने टेस्टोस्टेरोन और कुछ पेप्टाइड दवाओं के परामर्श संबंधी नियमों में ढील दी थी।

इन नियामकीय बदलावों के साथ-साथ एन्हांस्ड गेम्स ने उपभोक्ता स्वास्थ्य और लंबी उम्र से जुड़े उत्पादों के क्षेत्र में भी विस्तार किया है। खिलाड़ियों और प्रभावशाली व्यक्तियों, जैसे जो रोगन और ब्रायन जॉनसन, के जरिए एन्हांस्ड गेम्स ने अपनी पहुंच बढ़ाने, ऑनलाइन समर्थक जुटाने और वैधता हासिल करने की कोशिश की है, जिससे इसका व्यावसायिक बाजार और व्यापक हो सकता है।

प्रदर्शन बढ़ाने वाली दवाओं का उपयोग सार्वजनिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से चिंता का विषय है। इन दवाओं से जुड़े कई स्वास्थ्य जोखिम पहले से दर्ज हैं, जबकि इनके दीर्घकालिक दुष्प्रभाव अभी पूरी तरह ज्ञात नहीं हैं। ऐसे में एन्हांस्ड गेम्स द्वारा पीईडी का आक्रामक प्रचार चिंताजनक है।

एन्हांस्ड गेम्स में खिलाड़ियों को चौबीसों घंटे स्वास्थ्य विशेषज्ञों की निगरानी संबंधी सुविधा मिलेगी, लेकिन आम लोगों को ऐसी सुविधाएं नहीं मिलेंगी और उन्हें कहीं अधिक जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।

विशेष रूप से टेस्टोस्टेरोन के अत्यधिक उपयोग को लेकर चिंता जताई गई है, क्योंकि इससे स्थायी शारीरिक नुकसान हो सकता है।

द कन्वरसेशन

मनीषा वैभव

वैभव