वाशिंगटन, 24 जनवरी (एपी) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के ‘‘आक्रामक’’ रुख से नाराज होकर उन्हें अपने शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए दिया गया निमंत्रण वापस ले लिया।
इस बीच, ट्रंप की अगुवाई वाले इस संगठन को उनके कई पश्चिमी सहयोगी देश संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं। ट्रंप की अध्यक्षता वाले इस बोर्ड का शुरुआत में गठन हमास में इजराइल के युद्ध पर विराम लगाने पर केंद्रित था लेकिन आलोचकों को संदेह है कि यह संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाओं के विकल्प के तौर पर उभर सकता है।
कार्नी उन देशों के नेता के रूप में तेजी से उभर रहे हैं जो अमेरिका का मुकाबला करने के लिए एकजुट होने के तरीके खोज रहे हैं।
कार्नी ने दावोस में विश्व आर्थिक मंच के दौरान कहा, ‘‘मध्यम शक्ति वाले देशों को मिलकर कदम उठाना होगा, क्योंकि अगर आप बातचीत की मेज पर नहीं हैं, तो आप दांव पर हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘महाशक्तियों की प्रतिद्वंद्विता के दौर से गुजर रही दुनिया में, मध्यम शक्ति वाले देशों के पास एक विकल्प है- या तो वे कृपा पाने के लिए एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करें या फिर एक प्रभावशाली तीसरा मार्ग बनाने के लिए एकजुट हों।’’
कार्नी ने कहा, ‘‘हमें कठोर शक्तियों के उदय को इस तथ्य से नजरअंदाज नहीं होने देना चाहिए कि वैधता, ईमानदारी और नियमों की शक्ति मजबूत बनी रहेगी, यदि हम इसे मिलकर इस्तेमाल करने का फैसला करें।’’
ट्रंप ने इन टिप्पणियों को लेकर दावोस में धमकी भरे लहजे में प्रतिक्रिया दी और कनाडा को दिया ‘शांति बोर्ड’ का निमंत्रण वापस ले लिया।
ट्रंप ने कहा, ‘‘कनाडा का अस्तित्व अमेरिका की वजह से है। मार्क, अगली बार जब आप बयान दें तो यह बात याद रखना।’’
कार्नी हालांकि इसके बावजूद झुके नहीं और उन्होंने कनाडा को ‘‘उथल-पुथल और अनिश्चितता से घिरी दुनिया के लिए एक मिसाल’’ बताते हुए कहा कि बदलते दौर में रास्ता तलाश रहे विश्व के अन्य नेताओं के लिए कनाडा एक संभावित खाका पेश कर सकता है।
उन्होंने क्यूबेक सिटी में कैबिनेट की बैठक से पहले दिए भाषण में कहा, ‘‘हम यह दिखा सकते हैं कि एक दूसरा रास्ता भी संभव है और इतिहास की धारा का अधिनायकवाद तथा बहिष्कार की ओर मुड़ना कोई नियति नहीं है।’’
इस बीच, ट्रंप के इस बयान को लेकर शुक्रवार को ब्रिटेन में कई लोगों में आक्रोश देखा गया कि अफगानिस्तान युद्ध के दौरान नाटो देशों के सैनिक अग्रिम मोर्चे से दूर रहे थे।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर ने ट्रंप से उनके इस बयान के लिए माफी मांगने को कहा।
स्टार्मर ने कहा, ‘‘मैं राष्ट्रपति ट्रंप की टिप्पणियों को अपमानजनक और वास्तव में भयावह मानता हूं और मुझे आश्चर्य नहीं है कि इससे मारे गए या घायल हुए लोगों के परिजनों और वास्तव में पूरे देश को बहुत दुख पहुंचा है।’’
ट्रंप ने विश्व आर्थिक मंच में स्विट्जरलैंड पर शुल्क लगाने की बात कही। उन्होंने इसका कारण बताते हुए कहा कि फोन कॉल के दौरान उस देश के नेता का रवैया उन्हें ठीक नहीं लगा। हालांकि बाद में उन्होंने शुल्क कम कर दिया।
इसके अलावा ट्रंप का ग्रीनलैंड पर रुख लगभग हर दिन बदलता रहता है, वह कभी बलपूर्वक कब्जा करने की धमकी देते हैं तो कभी ऐसा न करने का आश्वासन।
विश्व आर्थिक मंच के केंद्र दावोस से अमेरिका लौटते हुए अलास्का की रिपब्लिकन सांसद लीसा मुर्कोव्स्की ने कहा कि उन्होंने बार-बार यह वाक्यांश सुना कि ‘‘हम इस नयी वैश्विक व्यवस्था में प्रवेश कर रहे हैं।’’
उन्होंने सहयोगी देशों के बीच भ्रम की स्थिति का जिक्र करते हुए संवाददाताओं से कहा, ‘‘हो सकता है कि राष्ट्रपति के साथ टेलीफोन पर आपकी बातचीत अच्छी नहीं रही हो और अब आप पर शुल्क लगाए जाने वाले हों।’’
उन्होंने कहा कि जो देश परंपरागत रूप से अमेरिका के भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार रहे हैं, वे भी अमेरिका के रुख को लेकर भ्रम की स्थिति में हैं।
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सिम्मी अमित
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