अमेरिकी सांसदों, आव्रजन पैरोकारों ने नयी ग्रीन कार्ड नीति की आलोचना की, वापस लेने की मांग की

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अमेरिकी सांसदों, आव्रजन पैरोकारों ने नयी ग्रीन कार्ड नीति की आलोचना की, वापस लेने की मांग की

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  • Publish Date - May 23, 2026 / 11:04 PM IST,
    Updated On - May 23, 2026 / 11:04 PM IST

वाशिंगटन, 23 मई (भाषा) अमेरिकी सांसदों और आव्रजन के पैरोकारों ने ट्रंप प्रशासन की नयी ग्रीन कार्ड नीति की कड़ी आलोचना करते हुए इसे ‘लापरवाहपूर्ण एवं गलत’ बताया है।

ट्रंप प्रशासन की इस नई नीति के तहत ग्रीन कार्ड चाहने वालों को अपने गृह देश से ही आवेदन करना होगा।

डेमोक्रेटिक सांसदों ने कहा कि वे अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) के इस ‘निंदनीय’ फैसले के खिलाफ संघर्ष करेंगे और इसे पलटने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।

यूएससीआईएस ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन समूहों को छूट दी जाएगी। इसने केवल यह संकेत दिया कि शायद यह नीति शरण मांगने वाले व्यक्तियों पर लागू नहीं हो।

शुक्रवार देर रात एक बयान में यूएससीआईएस के प्रवक्ता ज़ैक काहलर ने कहा कि जो लोग आर्थिक लाभ प्रदान करते हैं या अन्यथा राष्ट्र हित में हैं, वे संभवतः अपने वर्तमान मार्ग पर आगे बढ़ने में सक्षम होंगे।

यह तत्काल स्पष्ट नहीं हो पाया कि क्या ये अपवाद एच-1बी वीजा पर कार्यरत कुशल विदेशी श्रमिकों पर भी लागू होंगे या नहीं।

पूर्व राष्ट्रपति जो. बाइडन के पूर्व सलाहकार और ट्रंप प्रशासन की नई ग्रीन कार्ड प्रोसेसिंग नीति पर आव्रजन पैरोकार अजय भुटोरिया ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ‘‘इससे 12 लाख भारतीय अमेरिकी और उनके परिवार अधर में लटक गए हैं, जिन्होंने हर कानून का पालन किया, कर चुकाया और दशकों तक कानूनी रूप से इंतजार किया।’’

भुटोरिया ने कहा कि विभिन्न समूह इस नई नीति को चुनौती देने के लिए मुकदमे दायर करेंगे।

पूर्व नीति के तहत विदेशी कामगार अमेरिका के भीतर से ‘स्थिति समायोजन’ के लिए आवेदन करके गैर-प्रवासी से प्रवासी बन सकते थे।

अमेरिकी संसद ‘कांग्रेस’ की एशियाई प्रशांत अमेरिकी कॉकस की अध्यक्ष ग्रेस मेंग ने एक बयान में कहा, ‘‘यह लापरवाह नीति हर साल लाखों लोगों पर पड़ने वाले मानवीय नुकसान के प्रति घोर उपेक्षा दर्शाती है। हम इस निंदनीय निर्णय के खिलाफ संघर्ष करेंगे और इसे रद्द करवाने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।’’

‘केटो इंस्टिट्यूट’ में आव्रजन अध्ययन के निदेशक डेविड जे बियर ने इस नीति को ‘अतार्किक’ बताते हुए कहा कि इससे प्रतिभाशाली लोग दूसरे देशों की ओर पलायन करेंगे और अमेरिका व्यापार के लिए कम प्रतिस्पर्धी स्थान बन जाएगा।

भाषा राजकुमार नेत्रपाल

नेत्रपाल