सेना में एआई को आधार बनाने की अमेरिकी रणनीति वास्तविक क्षमताओं को नजरअंदाज करने वाली

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सेना में एआई को आधार बनाने की अमेरिकी रणनीति वास्तविक क्षमताओं को नजरअंदाज करने वाली

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  • Publish Date - January 22, 2026 / 05:22 PM IST,
    Updated On - January 22, 2026 / 05:22 PM IST

(जेना असाद, ऑस्टेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी)

सिडनी, 22 जनवरी (द कन्वरसेशन) अमेरिका के युद्ध विभाग ने इस महीने की शुरुआत में सैन्य उद्देश्य के लिए एआई के तेजी से उपयोग के लिए एक नई रणनीति जारी की है और उसका मानना है कि देश निर्विवाद रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता सक्षम लड़ाकू शक्ति बनने के लिए तैयार है।

“एआई एक्सिलरेशन स्ट्रेटेजी” का स्पष्ट मकसद अमेरिकी सेना को एआई आधारित युद्ध में अग्रणी बनाना है। हालांकि, यह रणनीति एआई की वास्तविक क्षमताओं और सीमाओं को नज़रअंदाज़ करती दिखती है और अधिक “एआई पीकॉकिंग” यानी दिखावटी नेतृत्व का प्रयास लगती है।

अमेरिका की एआई रणनीति में क्या शामिल है?

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चीन और इजराइल समेत दुनिया भर की कई सेनाएं अपने काम में एआई को शामिल कर रही हैं। लेकिन अमेरिका के युद्ध विभाग की नई रणनीति का ‘एआई-प्रथम’ मंत्र इसे सबसे अलग बनाता है।

यह रणनीति अमेरिकी सेना को अधिक खतरनाक और सक्षम बनाने की भी कोशिश है। इसमें कहा गया है कि एआई ही इस लक्ष्य को पाने का एकमात्र तरीका है।

युद्ध विभाग एआई मॉडल्स के साथ प्रयोगों को बढ़ावा देगा। यह सेना में हर स्तर पर एआई को लागू करने में आने वाली “प्रशासनिक रुकावटों” को भी खत्म करेगा, एआई ढांचे में निवेश को समर्थन देगा और एआई से संचालित बड़ी सैन्य परियोजनाओं को आगे बढ़ाएगा।

इनमें से एक परियोजना एआई का इस्तेमाल करके खुफिया जानकारी को “सालों में नहीं, बल्कि घंटों में हथियार में” बदलने की कोशिश से संबंधित है।

उदाहरण के लिए, गाजा में आम लोगों की मौत के मामलों की बढ़ती संख्या के बारे में लगातार खबरें आ रही हैं, जो इजराइल की सेना के एआई आधारित निर्णय लेने की प्रणाली की वजह से हुआ है। ये प्रणालियां असल में खुफिया जानकारी को अभूतपूर्व गति और पैमाने पर हथियारबंद लक्ष्य निर्धारण में बदल देती हैं।

एक और बड़ी परियोजना अमेरिकी एआई मॉडल्स (संभवत: सैन्य संदर्भ में इस्तेमाल होने वाली) को “सीधे हमारे 30 लाख आम लोगों और सैन्य कर्मियों के हाथों तक पहुंचाने से जुड़ी है।

यह साफ नहीं किया गया है कि 30 लाख आम अमेरिकियों को सेना की एआई सक्षम प्रणाली तक पहुंच की जरूरत क्यों है। न ही यह कि आम लोगों में सैन्य क्षमताओं को बड़े पैमाने पर फैलाने का क्या असर होगा।

कहानी बनाम असलियत

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जुलाई 2025 में, एआईटी के एक अध्ययन में पाया गया कि 95 प्रतिशत संगठनों को जेनरेटिव एआई में निवेश पर कोई लाभ नहीं मिला।

इसका मुख्य कारण चैटजीपीटी और कोपिलोट जैसे जेनरेटिव एआई टूल्स की तकनीकी खामियां रहीं।

‘एआई पीकॉकिंग’ के लिए एक दिशानिर्देश

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युद्ध विभाग की एआई-प्रथम की रणनीति तकनीक को लागू करने की सही रणनीति के बजाय “एआई पीकॉकिंग” यानी दिखावटी नेतृत्व के लिए एक गाइड जैसी ज्यादा लगती है।

एआई को हर समस्या का हल बताया जाता है, उन समस्याओं का भी जो हैं ही नहीं। एआई के पीछे की मार्केटिंग ने पीछे छूट जाने का एक मनगढ़ंत डर पैदा किया है। युद्ध विभाग की नई एआई रणनीति तकनीकी रूप से आधुनिक सैन्य रणनीति का उल्लेख करके उस डर को बढ़ावा देती है।

हालांकि, हकीकत यह है कि ये तकनीकी क्षमताएं उनके बताए गए असर के हिसाब से पिछड़ी हुई हैं। और, सैन्य परिवेश में, इन सीमाओं के खतरनाक नतीजे हो सकते हैं, जिसमें आम लोगों की मौत के मामलों में बढ़ोतरी भी शामिल है।

अमेरिका अपनी सेना में बिना किसी तकनीकी दृढ़ता और ईमानदारी के एआई को लागू करने के लिए मार्केटिंग वाले बिजनेस मॉडल पर बहुत अधिक निर्भर है।

(द कन्वरसेशन) वैभव नरेश

नरेश