सिंगापुर द्वीप के पास जुबिन गर्ग की मौत ‘दुर्घटनावश डूबने’ से हुई: सिंगापुर जांच अधिकरी

Ads

सिंगापुर द्वीप के पास जुबिन गर्ग की मौत ‘दुर्घटनावश डूबने’ से हुई: सिंगापुर जांच अधिकरी

  •  
  • Publish Date - March 25, 2026 / 05:21 PM IST,
    Updated On - March 25, 2026 / 05:21 PM IST

(गुरदीप सिंह)

सिंगापुर, 25 मार्च (भाषा) सिंगापुर के एक जांच अधिकारी ने बुधवार को भारतीय गायक जुबिन गर्ग की मौत को ‘दुर्घटनावश डूबने से हुई मौत’ करार दिया। गर्ग की सितंबर 2025 में सिंगापुर के एक द्वीप के पास डूबने से मृत्यु हो गई थी।

अधिकारी ने सिंगापुर की ‘पुलिस कोस्ट गार्ड’ (पीसीजी) की जांच को सही ठहराते हुए कहा कि इस घटना में किसी भी प्रकार की साजिश या बाहरी दबाव का कोई सबूत नहीं मिला है।

जांच अधिकारी एडम नाखोदा ने गर्ग की पत्नी द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि पीसीजी ने मामले में व्यापक और सावधानीपूर्वक जांच की थी।

उन्होंने कहा कि गर्ग की मौत ‘महज एक दुर्भाग्यपूर्ण और दुर्घटनापूर्ण रूप से डूबने’ के कारण हुई थी और किसी ने भी उन्हें पानी में जाने के लिए मजबूर नहीं किया था और न ही धक्का दिया था।

नाखोदा ने बताया कि जांच के अनुसार, गर्ग (52) शराब के नशे में थे। इसी वजह से संभवत: उन्होंने पहले तैराकी के दौरान ‘लाइफ जैकेट’ उतार दिया और दूसरी बार तैराकी के समय भी इसे पहनने से इनकार कर दिया था।

उन्होंने बताया कि वह 19 सितंबर को लाजारूस द्वीप के पास पहले तैराकी कर रहे थे और जब वे वापस लौट रहे थे तभी वह बेहोश होकर पानी में डूब गए। वह वहां आयोजित ‘नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल’ (एनईआईएफ) में भाग लेने गए थे। हालांकि, गायक की मौत की खबर मिलते ही कार्यक्रम को रद्द कर दिया था।

इस घटना के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण ‘डूबना’ पाया गया है।

उन्होंने यह भी बताया कि गर्ग के शराब सेवन के कारण उनकी समन्वय क्षमता और प्रतिक्रिया क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित थी। उनके रक्त में 333 मिलीग्राम प्रति 100 मिलीलीटर शराब पाई गई जो सिंगापुर में कानूनी सीमा 80 मिलीग्राम से कई गुना अधिक है।

इसके अलावा, उन्हें उच्च रक्तचाप और मिर्गी की समस्या पहले से थी लेकिन इस घटना के समय किसी मिर्गी के दौरे का सबूत निर्णायक नहीं था।

उन्होंने यह पुष्टि की कि दोनों बार वह अपनी इच्छा से तैरने के लिए गए थे और किसी ने उन्हें मजबूर नहीं किया था।

भाषा

प्रचेता नरेश

नरेश

नरेश