भाषाई विविधता के बावजूद धर्म ने भारत को एक रखा : उपराष्ट्रपति

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भाषाई विविधता के बावजूद धर्म ने भारत को एक रखा : उपराष्ट्रपति

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  • Publish Date - September 28, 2025 / 01:48 PM IST,
    Updated On - September 28, 2025 / 01:48 PM IST

पटना, 28 सितंबर (भाषा) उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने रविवार को कहा कि भारत की असली ताकत ‘‘धर्म’’ की वह अवधारणा है जिसने भाषाई विविधता के बावजूद देश को एक सूत्र में पिरोए रखा है।

उन्होंने यह बात पटना में आयोजित अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव ‘उन्मेष’ के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कही।

राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘यूरोप के एक महानुभाव ने मुझसे पूछा कि भारत बिना किसी एक भाषा के कैसे एकजुट रह पाता है। मैंने उत्तर दिया कि यहां के लोग भले ही अलग-अलग भाषाओं में बोलते हैं, लेकिन वे धर्म की अवधारणा के माध्यम से एकजुट रहते हैं।’’

उपराष्ट्रपति बनने के बाद राधाकृष्णन का बिहार का पहला यह दौरा है। पटना हवाई अड्डे पर उनका स्वागत राज्यपाल अरिफ मोहम्मद खान और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने किया।

समारोह में अपने संबोधन के दौरान राधाकृष्णन ने राज्यपाल खान को ‘‘पुराना मित्र’’ बताया और कहा कि दोनों सांसद रहते हुए भी साथ काम कर चुके हैं।

कार्यक्रम स्थल की ओर जाते समय रास्ते में उपराष्ट्रपति ने कुछ देर रुककर महान समाजवादी लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने अपने संबोधन में ‘लोकनायक’ से जुड़ा व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किया।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने 19 वर्ष की आयु में लोकनायक जयप्रकाश नारायण द्वारा शुरू किए गए संपूर्ण क्रांति आंदोलन में खुद को झोंक दिया था। बाद में मैं इस आंदोलन का जिला महासचिव भी बना।’’

राधाकृष्णन ने याद किया कि उनकी सामाजिक-राजनीतिक यात्रा की शुरुआत अपने गृह राज्य तमिलनाडु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवक के रूप में हुई थी।

भाषा कैलाश

शोभना खारी

खारी