paparao/ image source: IBC24
Naxalite Paparao Surrender Live Video: जगदलपुर: छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में नक्सल विरोधी अभियान के तहत बड़ी सफलता सामने आई है, जहां नक्सल कमांडर पापा राव ने औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण कर दिया। उनके साथ DVCM प्रकाश मड़वी, अनिल ताती सहित कुल 18 नक्सलियों ने सरेंडर किया, जिनमें 11 पुरुष और 7 महिलाएं शामिल हैं। सरेंडर के दौरान नक्सलियों ने AK-47, SLR और इंसास रायफल जैसे घातक हथियार भी सुरक्षा बलों के सामने जमा किए। इस मौके पर बस्तर आईजी पी. सुंदरराज ने सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को संविधान की पुस्तक भेंट कर मुख्यधारा में लौटने का संदेश दिया। प्रशासन ने इसे शांति स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
पापा राव का नाम बस्तर के जंगलों में दहशत का पर्याय रहा है। पिछले दो दशकों से वह माओवादी संगठन की वेस्ट बस्तर डिवीजन की कमान संभाल रहा था। हिडमा के मारे जाने के बाद वह क्षेत्र का सबसे अनुभवी और खतरनाक कमांडर बन गया था। 25 लाख रुपये का इनाम होने के बावजूद वह सुरक्षा बलों की कई घेराबंदियों से बच निकला। अब जब उसके सरेंडर की खबर आई है तो बस्तर के आदिवासी इलाकों में राहत की लहर दौड़ गई है। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि अगर पापा राव मुख्यधारा में आ गया तो नक्सलवाद की आखिरी कड़ी भी टूट जाएगी। यह खबर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र सरकार ने मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सल मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। पापा राव के मामले में सुरक्षा बलों की सफलता पूरे अभियान की सबसे बड़ी कामयाबी होगी। 2025-26 में बस्तर में अब तक सैकड़ों नक्सली हथियार छोड़ चुके हैं। पापा राव का मामला अंतिम बड़ा कदम माना जा रहा है।
आपकों बता दें की पापा राव संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। उनके साथ बड़ी संख्या में नक्सलियों का सरेंडर होना सुरक्षा बलों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। पापा राव का नाम बस्तर के जंगलों में दहशत का पर्याय रहा है। पिछले दो दशकों से वह माओवादी संगठन की वेस्ट बस्तर डिवीजन की कमान संभाल रहा था। हिडमा के मारे जाने के बाद वह क्षेत्र का सबसे अनुभवी और खतरनाक कमांडर बन गया था। 25 लाख रुपये का इनाम होने के बावजूद वह सुरक्षा बलों की कई घेराबंदियों से बच निकला था।
Naxalite Paparao Surrenders पापा राव का असली नाम मंगू दादा या चंद्रन्ना है। वह सुकमा जिले के निमलगुड़ा गांव का रहने वाला है। 50 वर्ष से अधिक उम्र का यह नक्सली 1990 के दशक से माओवादी आंदोलन से जुड़ा हुआ है। वह वेस्ट बस्तर डिवीजन कमेटी का प्रमुख कमांडर है और कई बड़े हमलों की योजना बनाने का आरोप है।
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