(8th Pay Commission Pensioners Demand/ Image Credit: AI-generated)
नई दिल्ली: 8th Pay Commission Pensioners Demand: 8वें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को लेकर पेंशनभोगी संगठनों ने केंद्र सरकार से बदलाव (8th Pay Commission Pensioners Demand) की मांग की है। भारत पेंशनर्स समाज (BPS), ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF), NCCPA और FCPA जैसे संगठनों ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र भेजा है और संगठनों ने मांग की है कि 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन और फैमिली पेंशन के संशोधन को ToR में साफ तौर पर शामिल किया जाए।
पेंशनर्स संगठनों का कहना है कि मौजूदा ToR में पुराने पेंशनभोगियों की पेंशन समीक्षा को लेकर (8th Pay Commission Pensioners Demand) पर्याप्त स्पष्टता नहीं है। उनका कहना है कि पेंशन संशोधन, पुराने और भविष्य के पेंशनर्स के बीच समानता, फैमिली पेंशन और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले अन्य लाभों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। इसलिए संगठनों ने सभी लागू पेंशन योजनाओं के तहत पेंशन और उससे जुड़े लाभों की समीक्षा का प्रावधान जोड़ने की मांग की है।
AIDEF ने ToR में गैर-अंशदायी पेंशन योजनाओं की ‘अनफंडेड कॉस्ट’ यानी बिना फंड वाली लागत के उल्लेख पर भी सवाल उठाया है। संगठन का तर्क है कि सरकारी कर्मचारियों को सेवा के बाद मिलने वाली पेंशन को केवल सरकारी वित्तीय देनदारी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक पेंशन कर्मचारियों के लंबे समय की सेवा से जुड़ा अधिकार है। इसलिए इस शब्द को हटाने या बदलने की जरूरत है।
संगठनों का कहना है कि ओल्ड पेंशन स्कीम के तहत सरकार पर आने वाले खर्च को केवल वित्तीय बोझ बताना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि सरकारी कर्मचारियों की पेंशन सेवा के बदले मिलने वाला लाभ है। चूंकि पुरानी पेंशन व्यवस्था में कर्मचारियों की सैलरी से योगदान नहीं काटा जाता, इसलिए इसका पूरा भुगतान सरकार करती है। इसी वजह से ToR में इस्तेमाल शब्दों को लेकर संगठनों ने आपत्ति जताई है।
पेंशनर्स संगठनों ने पुराने और नए रिटायर कर्मचारियों के बीच पेंशन में मौजूद अंतर को खत्म करने की भी (8th Pay Commission Pensioners Demand) मांग की है। उनका कहना है कि समान परिस्थितियों में रिटायर कर्मचारियों को पेंशन में बराबरी मिलनी चाहिए। इसके अलावा आयोग के सामने न्यूनतम बेसिक पेंशन को मौजूदा 9,000 रुपये से बढ़ाकर 45,000 रुपये प्रति माह करने का प्रस्ताव रखने की बात कही गई है। अब पेंशनर्स की नजर सरकार के अगले कदम पर बनी हुई है।