नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) वेदांता लि. के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने मंगलवार को वैश्विक संकट के बीच विदेशी मुद्रा बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील का समर्थन किया। उन्होंने तेल, सोना और अन्य महत्वपूर्ण संसाधनों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए खनन क्षेत्र में तेजी से सुधारों का भी आह्वान किया।
अग्रवाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, ‘‘संकट और अनिश्चितता के इस दौर में विदेशी मुद्रा बचाने के लिए प्रधानमंत्री की अपील से मैं पूरी तरह सहमत हूं।’’
उन्होंने देश की आयात पर भारी निर्भरता का उल्लेख करते हुए कहा कि अकेले तेल और सोना भारत के कुल आयात का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हैं। अन्य भूमिगत संसाधनों को शामिल करें तो यह आंकड़ा 50 प्रतिशत तक पहुंच जाता है।
अग्रवाल ने कहा, ‘‘इसे कम करने का एक तरीका है कम उपभोग करना। दूसरा तरीका है अधिक उत्पादन करना। प्रधानमंत्री की चिंता का विषय तेल और सोना है, जो भारत के दो सबसे बड़े आयात हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी भौगोलिक स्थिति और मौजूदा संसाधनों को देखते हुए, हम उत्पादन को तेजी से और बड़े पैमाने पर बढ़ा सकते हैं। ऐसा पहले भी हो चुका है।’’
तेल, गैस, धातु और खनन जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनी वेदांता के प्रमुख ने इस क्षमता को उजागर करने के लिए दो प्रमुख सुधारों…निजीकरण और मंजूरी में स्व-प्रमाणन का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर, भूमिगत क्षेत्र में 24 सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम हैं जिनका निजीकरण किया जा सकता है और इससे उत्पादन में कई गुना वृद्धि होगी। हिंदुस्तान जिंक लि. (एचजेडएल) और बाल्को जैसी कंपनियों का निजीकरण पूरा करने से उत्पादन और रोजगार में काफी वृद्धि होगी। हिंदुस्तान जिंक में सरकार की 26 प्रतिशत और बाल्को में सरकार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
अग्रवाल ने कहा, ‘‘जब वेदांता ने 2002 में एचजेडएल का अधिग्रहण किया था, तब भारत जस्ता के लिए आयात पर निर्भर था। आज हम उन्हीं संसाधनों के साथ आत्मनिर्भर हैं। हमने अनुसंधान एवं विकास किया और चांदी और सीसा का उत्पादन शुरू किया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी और अब हम दुर्लभ खनिज के उत्पादन के लिए अनुसंधान एवं विकास कर रहे हैं। एल्युमीनियम में उत्पादन एक लाख टन था और अब हम 60 लाख टन उत्पादन करने की प्रक्रिया में हैं।’’
अग्रवाल के अनुसार, उन्हें पूरा विश्वास है कि भारत मौजूदा संसाधनों के साथ घरेलू स्तर पर पर्याप्त संसाधन उत्पादित कर सकता है, जिससे आयात काफी हद तक कम हो जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार को निजी क्षेत्र पर भरोसा करना चाहिए ताकि तेल, सोना, चांदी, तांबा, उर्वरक और कई अन्य संसाधनों के आयात के कारण होने वाली किसी भी तरह की अनिश्चितता को पूरी तरह से दूर किया जा सके।’’
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग, सोने की खरीद और विदेश यात्रा को स्थगित करने जैसे उपायों का आह्वान किया था।
उन्होंने हैदराबाद में तेलंगाना भाजपा की एक रैली को संबोधित करते हुए पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच विदेशी मुद्रा बचाने के लिए पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने, शहरों में मेट्रो रेल सेवाओं का उपयोग करने, कार ‘पूलिंग’ करने, इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) का अधिक उपयोग करने और घर से काम करने का सुझाव दिया।
भाषा रमण अजय
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