ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल तक उछलने के बाद थोड़ा नरम पड़ा

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ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल तक उछलने के बाद थोड़ा नरम पड़ा

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  • Publish Date - March 9, 2026 / 12:58 PM IST,
    Updated On - March 9, 2026 / 12:58 PM IST

शिकागो, नौ मार्च (एपी) पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष तेज होने के बीच सोमवार को कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में जबर्दस्त उछाल देखा गया। कच्चा तेल करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाने के बाद थोड़ा नरम पड़ता नजर आया।

ईरान पर अमेरिका एवं इजराइल के हमले से पैदा हुए हालात में कच्चे तेल की आपूर्ति बड़े पैमाने पर बाधित होने की आशंका बढ़ गई है। इस वजह से कच्चे तेल की कीमतों में जबर्दस्त तेजी दर्ज की गई।

अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 119.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। हालांकि बाद में यह घटकर 112.98 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई।

वहीं, अमेरिका में उत्पादित होने वाला हल्का कच्चा तेल वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) 119.48 डॉलर तक पहुंचने के बाद घटकर 110.17 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग के दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर जाने से फारस की खाड़ी से तेल और गैस के उत्पादन तथा परिवहन से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर असर पड़ रहा है।

स्वतंत्र शोध कंपनी रिस्टैग एनर्जी के मुताबिक, हर दिन लगभग 1.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भेजा जाता रहा है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत है।

लेकिन ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे के कारण इस मार्ग से तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में खासा उछाल देखने को मिला है।

इस जलडमरूमध्य के रास्ते सऊदी अरब, कुवैत, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ईरान से तेल और गैस का निर्यात होता है। लेकिन निर्यात बाधित होने से इराक, कुवैत और यूएई को तेल उत्पादन घटाना पड़ा है।

ऊर्जा कीमतों में उछाल का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। अधिक ऊर्जा लागत से महंगाई बढ़ने और उपभोक्ता खर्च पर दबाव की आशंका है।

युद्ध के बीच एशियाई शेयर बाजारों में भी तेज गिरावट देखी गई और जापान का सूचकांक निक्की सोमवार को शुरुआती कारोबार में सात प्रतिशत से अधिक गिर गया।

एपी प्रेम प्रेम

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