नयी दिल्ली, 31 जुलाई (भाषा) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को प्रमुख बंदरगाहों में बंदरगाह-आधारित उद्योगों को भूमि के आवंटन के लिए एक संशोधित नीति को मंजूरी दे दी।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार संशोधित नीति मौजूदा कैप्टिव उपयोगकर्ताओं को 30 वर्षों तक की बढ़ी हुई आवश्यकता के लिए नई बर्थ, जेट्टी, टर्मिनल, सिंगल बॉय मूरिंग (एसबीएम) जोड़ने की अनुमति देती है। साथ ही नीति बदलते कारोबारी और नियामक स्थितियों से होने वाले बदलावों का समाधान भी करती है।
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि संशोधित नीति बंदरगाह-संचालित औद्योगिक विकास के लिए एक अनुमानित, पारदर्शी और निवेशक अनुकूल ढांचा तैयार करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
सोनोवाल ने कहा, ”संशोधित कैप्टिव नीति एक प्रमुख सुधार है, जो सार्वजनिक हित के साथ निवेशकों के विश्वास को संतुलित करती है। मौजूदा परिचालको को दीर्घकालिक निश्चितता प्रदान करके, क्षमता विस्तार की सुविधा देकर और भविष्य के निवेश के लिए एक पारदर्शी ढांचा तैयार करके यह कदम उठाया गया है।”
बयान में कहा गया कि इस नीति से निवेशकों को अधिक निश्चितता मिलने, क्षमता वृद्धि को बढ़ावा मिलने और सरकार पर बिना किसी वित्तीय प्रभाव के बंदरगाह क्षेत्र में व्यापार करने में आसानी की उम्मीद है।
बयान के अनुसार ये सुधार प्रमुख बंदरगाह प्राधिकरणों को किसी नई निविदा प्रक्रिया की आवश्यकता के बिना मौजूदा बंदरगाह आधारित उद्योगों (पीडीआई) के रियायत समझौतों को 30 साल तक नवीनीकृत या विस्तारित करने की अनुमति देते हैं।
भाषा पाण्डेय रमण
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