वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं संरचनात्मक अस्थिरता के युग में प्रवेश कर रही हैं: विश्व आर्थिक मंच

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं संरचनात्मक अस्थिरता के युग में प्रवेश कर रही हैं: विश्व आर्थिक मंच

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  • Publish Date - January 19, 2026 / 01:26 PM IST,
    Updated On - January 19, 2026 / 01:26 PM IST

(वरुण झा)

दावोस, 19 जनवरी (भाषा) वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं संरचनात्मक अस्थिरता के युग में प्रवेश कर चुकी हैं जिससे कंपनियों तथा सरकारों को यह पुनर्मूल्यांकन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है कि वे कैसे और कहां निवेश एवं उत्पादन करते है। साथ ही अब चार में से तीन उद्योगपति वृद्धि के चालक के रूप में जुझारूपन को प्राथमिकता दे रहे हैं। एक नई रिपोर्ट में सोमवार को यह बात सामने आई।

विश्व आर्थिक मंच (डबल्यूईएफ) की 2026 की वार्षिक बैठक से पहले जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि यह अस्थिरता..भू-राजनीति, औद्योगिक नीति, ऊर्जा बदलाव और प्रौद्योगिकी में तेजी के कारण वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के मूलभूत पुनर्गठन को दर्शाती है।

‘ग्लोबल वैल्यू चेन्स आउटलुक 2026’ को उद्योग, सरकार तथा शिक्षा जगत के लोगों के साथ 100 से अधिक परामर्शों और 300 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों के सर्वेक्षण आंकड़ों से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

इसमें उद्योग के लिए रणनीतिक अनिवार्यताओं को परिभाषित करने और औद्योगिक नीति के लिए एक खाका तैयार करने का आह्वान किया गया।

अध्ययन में तमिलनाडु के स्थिर एवं पूर्वानुमानित निवेश माहौल का उदाहरण देते हुए कहा गया कि राजनीतिक स्थिरता, सुसंगत विनियमन, अनुकूलित प्रोत्साहन, मजबूत बुनियादी ढांचा और कुशल प्रतिभा के कारण यह राज्य भारत के सबसे विश्वसनीय औद्योगिक गंतव्यों में से एक बन गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘ पिछले 15 वर्ष से, इसकी पूर्वानुमानित नीतियों ने दीर्घकालिक वैश्विक निवेशों को आकर्षित किया है। जापानी कंपनियां संचालन में सुगमता एवं त्वरित अनुमोदन का हवाला देती हैं जबकि विनफास्ट (एक वियतनामी इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माता) ने तमिलनाडु की सक्रिय नीतियों एवं कार्यबल की तत्परता को श्रेय देते हुए 400 एकड़ में फैली अपनी 50,000 इकाई वाली ईवी सुविधा को मात्र 17 महीनों में स्थापित कर लिया, जो सामान्य तौर पर लगने वाले 24-36 महीनों की तुलना में काफी जल्दी किया गया।

इसमें कहा गया, ‘‘ यह स्थिर, निवेश-अनुकूल माहौल राज्य को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक विश्वसनीय केंद्र के रूप में स्थापित करता है।’’

रिपोर्ट में आयरलैंड, चीन और कतर जैसे देशों के उदाहरण भी दिए गए कि वे किस प्रकार लक्षित राष्ट्रीय दृष्टिकोण विनिर्माण प्रतिस्पर्धा को आकार दे रहे हैं।

डब्ल्यूईएफ की प्रबंध निदेशक के. ऑलगुड ने कहा, ‘‘ अस्थिरता अब कोई अस्थायी व्यवधान नहीं है। यह एक संरचनात्मक स्थिति है जिसके लिए नेताओं को योजना बनानी होगी।’’

ऑलगुड ने कहा, ‘‘ प्रतिस्पर्धी लाभ अब दूरदर्शिता, विकल्पों की उपलब्धता एवं परिवेश तंत्र समन्वय से प्राप्त होता है। जो कंपनियां और देश मिलकर इन क्षमताओं का निर्माण करेंगे, वे तेजी से खंडित हो रही वैश्विक अर्थव्यवस्था में निवेश आकर्षित करने, आपूर्ति सुरक्षित करने और वृद्धि बनाए रखने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में होंगे।’’

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा