नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने बुधवार को सरकार से आग्रह किया कि वह शुल्क के जरिये भारत की तेल खरीद को प्रभावित करने की किसी भी अमेरिकी कोशिश के आगे न झुके।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध संगठन एसजेएम ने भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता समानता, पारस्परिकता एवं आपसी सम्मान के आधार पर करने और कृषि, डेयरी, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता से समझौता करने वाली किसी भी मांग को स्वीकार नहीं करने का आह्वान किया।
एसजेएम के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने बयान में कहा कि संगठन अमेरिकी सीनेट में हाल में पारित उस विधेयक से ‘बहुत निराश’ है, जिसमें रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी राष्ट्रपति को 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है।
संगठन ने कहा कि इस विधेयक को अभी विधायी प्रक्रिया से गुजरना है और यह शुल्क स्वत: नहीं लगेगा, लेकिन यह मुक्त एवं निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय व्यापार तथा देशों के अपनी ऊर्जा नीति तय करने के संप्रभु अधिकार के लिए गंभीर खतरा है।
महाजन ने कहा कि भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद ऊर्जा सुरक्षा, उपलब्धता, कीमत, आपूर्ति स्रोतों में विविधता और भारतीय उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखकर की जाती है।
एसजेएम ने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत के बीच अमेरिका इस विधेयक का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर सकता है। संगठन ने सरकार से कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों तथा भारत की ऊर्जा नीति तय करने के अधिकार पर दृढ़ रहने को कहा।
संगठन ने ई-कॉमर्स में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए माल भंडारण पर लगी पाबंदियां हटाने के सरकार के फैसले का भी विरोध किया। उसने कहा कि इससे अमेजन और फ्लिपकार्ट-वॉलमार्ट जैसी अमेरिकी कंपनियों को फायदा होगा और भारतीय निर्यातकों को नुकसान हो सकता है। एसजेएम ने संबंधित अधिसूचना वापस लेने की मांग की।
इसके साथ ही स्वदेशी जागरण मंच ने कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 का भी विरोध करते हुए कहा कि इसमें यूपीआई लेनदेन पर व्यापारी छूट दर (एमडीआर) लगाने का रास्ता खुलता है। उसने कहा कि इससे वीजा और मास्टरकार्ड जैसी वैश्विक कंपनियों को लाभ हो सकता है।
महाजन ने ‘राष्ट्रवादी और देशभक्त ताकतों’ से अमेरिका के ‘एकतरफा कदमों’ के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने अमेरिकी प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने तथा पेप्सी एवं कोक समेत अमेरिकी कंपनियों के उत्पादों और उनके सोशल मीडिया एवं ई-कॉमर्स मंचों के बहिष्कार की अपील भी की।
एसजेएम ने कहा कि यदि अमेरिका भारत के हितों के खिलाफ कदम जारी रखता है तो यह बहिष्कार अन्य अमेरिकी कंपनियों की सेवाओं तक भी बढ़ाया जा सकता है।
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