नयी दिल्ली, 17 मई (भाषा) गुजरात में गर्मी की मूंगफली फसल आने की संभावना के बीच बीते सप्ताह मूंगफली तेल-तिलहन के दाम टूट गये जबकि कमजोर आवक और मांग बढ़ने से सरसों एवं सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल के दाम मजबूत बंद हुए।
बीते सप्ताह सरकार ने आयातित तेलों के आयात शुल्क मूल्य में वृद्धि की और सीपीओ के लिए यह शुल्क 4.5 रुपये क्विंटल तथा सोयाबीन डीगम तेल के लिए 1.5 रुपये क्विंटल बढ़ा दिया।
बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि विदेशों में खाद्य तेलों के दाम में बेहद मामूली घट-बढ़ हुई है लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपये के अपने सर्वकालिक निचले स्तर के आसपास मंडराने की वजह से यहां खाद्य तेलों के दाम बढे नजर आ रहे हैं। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश के कुछ सोयाबीन प्लांट वालों ने सोयाबीन की खरीद के दाम बढ़ाये हैं जिसकी वजह से बीते सप्ताह सोयाबीन तेल-तिलहन में सुधार आया।
उन्होंने कहा कि हालांकि आयातकों द्वारा आयातित खाद्य तेल की पहले के मुकाबले कम घाटे के साथ बिक्री जारी है। पहले आयातक लागत से अधिक नीचे दाम पर आयातित खाद्य तेलों की बिक्री कर रहे थे।
सूत्रों ने कहा कि सरसों का तेल काफी सस्ता होने की वजह से इस तेल की मांग है। इसके अलावा किसान भी नाप-तौल कर ही अपने सौदे बेच रहे हैं जिससे उनको दाम भी अच्छे मिल रहे हैं। इस बार सोयाबीन, सरसों, बिनौला का जो न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कहीं अधिक दाम किसानों को मिला है, उससे उम्मीद की जा रही है कि आगे इन फसलों की खेती का रकबा और बढ़ सकता है। सस्ता होने की वजह से मांग बढ़ने के कारण सरसों तेल-तिलहन के दाम में भी सुधार आया।
उन्होंने कहा कि कपास नरमा का भाव एमएसपी से 10-11 प्रतिशत अधिक है और यह दाम बढ़कर 9,000 रुपये क्विंटल से अधिक हो गया है। आवक कम रहने और मांग बढ़ने के बीच बिनौला तेल के दाम में भी सुधार आया।
सूत्रों ने कहा कि 90 के दशक में कई राज्यों में तिलहन फसलों की अच्छी खेती होती थी जिस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिये जाने की वजह से धीरे-धीरे खेती खत्म होती चली गई। आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सूरजमुखी की खेती लगभग 27 लाख हेक्टेयर में होती थी। इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिये जाने की वजह और कुछ महंगाई के नाम पर किसानों को लाभ से वंचित करने वाले समीक्षकों की वजह यह खेती आज लगभग खत्म हो चली है।
उन्होंने कहा कि किसानों को आज भी फसल के अच्छे दाम दिये जायें और उनके खाद्य तेलों के खपने की स्थितियां बना दी जायें तो देश के किसान किसी भी सहायता के बगैर अकेले तिलहन उत्पादन बढ़ाने की क्षमता रखते हैं।
सूत्रों ने बताया कि बीते सप्ताह सरसों दाना 175 रुपये के सुधार के साथ 7,175-7,200 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों तेल 500 रुपये के सुधार के साथ 14,850 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल क्रमश: 60-60 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 2,460-2,560 रुपये और 2,460-2,605 रुपये टिन (15 किलो) पर मजबूत बंद हुए।
समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाना और सोयाबीन लूज का थोक भाव क्रमश: 350-350 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 7,300-7,350 रुपये और 6,950-7,025 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
इसी प्रकार, दिल्ली में सोयाबीन तेल 150 रुपये सुधार के साथ 15,825 रुपये प्रति क्विंटल, सोयाबीन इंदौर तेल 150 रुपये के सुधार के साथ 15,725 रुपये और सोयाबीन डीगम तेल 25 रुपये सुधार के साथ 12,275 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
गर्मी की फसल आने की आहट के बीच बीते सप्ताहांत मूंगफली तिलहन का दाम 125 रुपये टूटकर 6,225-7,000 रुपये क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात 250 रुपये टूटकर 15,500 रुपये क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 30 रुपये टूटकर 2,470-2,770 रुपये प्रति टिन पर बंद हुए।
समीक्षाधीन सप्ताह में सीपीओ तेल का दाम 225 रुपये की मजबूती के साथ 13,850 रुपये प्रति क्विंटल, पामोलीन दिल्ली का भाव 250 रुपये की मजबूती के साथ 15,650 रुपये प्रति क्विंटल तथा पामोलीन एक्स कांडला तेल का भाव भी 225 रुपये की मजबूती के साथ 14,500 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
सुधार के आम रुख और कम उपलब्धता के बीच मांग बढ़ने से बिनौला तेल का दाम भी 400 रुपये के सुधार के साथ 15,650 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
भाषा राजेश
अजय
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