चंडीगढ़, दो जून (भाषा) केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को मंत्रालय से जुड़ी संसदीय सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में भारत की स्वच्छ ऊर्जा पहल को समर्थन देने के लिए एक मजबूत और भविष्य के लिए तैयार बिजली ग्रिड के निर्माण पर चर्चा हुई।
लाल ने कहा, ‘‘हमारी चर्चा भारत की स्वच्छ ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को समर्थन देने के लिए एक मजबूत और भविष्य के लिए तैयार विद्युत ग्रिड के निर्माण पर केंद्रित रही।’’
बैठक के बाद मंत्री ने बताया कि सदस्यों ने पारेषण विस्तार, ऊर्जा भंडारण, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण, बेहतर अनुमान और प्रणाली स्थिरता को मजबूत करने वाली प्रौद्योगिकियों की तैनाती के माध्यम से ग्रिड की मजबूती बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श किया।
बैठक में बिजली की बढ़ती मांग और बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण के बीच ग्रिड स्थिरता पर ध्यान केंद्रित किया गया।
लाल ने भारत के स्वच्छ ऊर्जा बदलाव को समर्थन देने के लिए एक विश्वसनीय और मजबूत ग्रिड के महत्व का उल्लेख किया।
उन्होंने बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि 21 मई, 2026 को बिजली की अधिकतम मांग 270.8 गीगावाट थी और इस मांग को पूरा किया गया। यह 283 गीगावाट की उत्पादन क्षमता से कम थी।
मंत्री ने कहा कि 2024 में बिजली की अधिकतम मांग 250 गीगावाट तक पहुंच गई थी।
लाल ने कहा, ‘‘अगले साल, अगर 330 गीगावाट की अधिकतम मांग भी आती है, तो हम उसे पूरा कर लेंगे।’’
उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा उत्पादन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाने के लिए आवश्यक पारेषण प्रणाली, बैटरी भंडारण, सौर ऊर्जा के उपयोग के लिए पंप भंडारण जैसी सभी चीजों का ध्यान रखा जा रहा है।
लाल ने सरकारी उपभोक्ताओं से शुरू करके, 10 किलोवाट से अधिक ‘लोड’ वाले उच्च-स्तरीय उपभोक्ताओं तक प्रीपेड स्मार्ट मीटर को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की आवश्यकता बतायी। साथ ही स्वैच्छिक बदलाव के लिए उपयुक्त प्रोत्साहन प्रणाली भी प्रदान किए जाने चाहिए।
इस बैठक में केंद्रीय विद्युत राज्यमंत्री श्रीपद येसो नाइक, सलाहकार समिति के सदस्य सांसद, विद्युत मंत्रालय के सचिव और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण सहित बिजली क्षेत्र के प्रमुख संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
भाषा रमण अजय
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