(PF Balance Grow/ Image Credit: AI-generated)
नई दिल्ली: PF Balance Grow: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.25% ब्याज की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उम्मीद है कि जल्द ही यह ब्याज कर्मचारियों की EPF पासबुक में दिखाई देने लगेगा। लेकिन कई कर्मचारियों के मन में अब यह सवाल रहता है कि जब ब्याज की गणना (PF Balance Grow) हर महीने होती है तो फिर खाते में हर महीने रकम क्यों नहीं दिखती। इसका कारण EPFO का ब्याज जमा करने का तरीका है।
EPF पर मिलने वाला 8.25% ब्याज सालाना दर होती है। कई लोग मान लेते हैं कि इसका लगभग 0.69% ब्याज हर महीने खाते में जमा हो जाता है लेकिन ऐसा नहीं होता। EPFO आपके खाते में मौजूद बैलेंस (PF Balance Grow) और हर महीने होने वाले योगदान के आधार पर ब्याज की गणना करता है। लेकिन पूरे वित्त वर्ष का ब्याज एक साथ साल के अंत में खाते में क्रेडिट किया जाता है। इसलिए बीच साल में पासबुक देखने पर ब्याज अलग से दिखाई नहीं देता।
EPF में ब्याज की गणना हर महीने के बैलेंस के हिसाब से होती है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी कर्मचारी के PF खाते में अप्रैल की शुरुआत में 5 लाख रुपये हैं और हर महीने कर्मचारी व नियोक्ता मिलकर 10 हजार रुपये जमा करते हैं तो अप्रैल का ब्याज 5 लाख रुपये पर निकलेगा। मई में नया योगदान जुड़ने के बाद बैलेंस बढ़ जाएगा और अगले महीने ब्याज भी ज्यादा राशि (PF Balance Grow) पर बनेगा। यही प्रक्रिया पूरे साल जारी रहती है।
EPF की सबसे बड़ी खासियत कंपाउंडिंग का फायदा है। जैसे-जैसे हर महीने योगदान बढ़ता जाता है वैसे-वैसे ब्याज कमाने वाली राशि भी बढ़ती जाती है। अगर कोई कर्मचारी लंबे समय तक नियमित रूप से PF में निवेश करता रहता है तो छोटी-छोटी मासिक बचत समय के साथ बड़ी रिटायरमेंट रकम में बदल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबी अवधि के निवेश में कंपाउंडिंग काफी प्रभावी भूमिका निभाती है।
EPF को भारत की प्रमुख रिटायरमेंट सेविंग योजनाओं में गिना जाता है। इसमें कर्मचारी के साथ नियोक्ता भी योगदान देता है जिससे बचत तेजी से बढ़ती है। इसके अलावा EPF में टैक्स से जुड़े फायदे भी मिलते हैं। कर्मचारियों को सलाह दी जाती है कि वे समय-समय पर अपनी EPF पासबुक (PF Balance Grow) जांचते रहें और यह सुनिश्चित करें कि कंपनी की ओर से हर महीने सही समय पर योगदान जमा हो रहा है। सबसे जरूरी बात यह है कि ब्याज हर महीने दिखाई न देने का मतलब यह नहीं है कि पैसा नहीं बढ़ रहा। EPFO लगातार ब्याज की गणना करता रहता है और सालाना आधार पर उसे खाते में जोड़ता है।