मुंबई, दस फरवरी (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को अनुपालन बोझ कम करने के लिए 1,000 करोड़ रुपये से कम संपत्ति वाली और जमा स्वीकार न करने वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को पंजीकरण से छूट देने का प्रस्ताव दिया है। इन्हें ‘टाइप-1’ एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।
एक मसौदा परिपत्र में आरबीआई ने प्रस्तावित किया कि ऐसी एनबीएफसी जो सार्वजनिक धन का उपयोग नहीं कर रही हैं, जिनका आम ग्राहकों से कोई सीधा संपर्क नहीं है और जिनकी संपत्ति का आकार 1,000 करोड़ रुपये से कम है, उन्हें केंद्रीय बैंक के साथ पंजीकरण की आवश्यकता से छूट दी जाएगी। यह निर्णय उनके विशिष्ट व्यावसायिक मॉडल और कम जोखिम प्रोफाइल को देखते हुए लिया गया है।
मसौदा अधिसूचना के अनुसार ऐसी एनबीएफसी को एक अप्रैल, 2026 से आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 45आईए के प्रावधानों से छूट दी जाएगी। अब तक इन कंपनियों के लिए उक्त धारा के तहत पंजीकरण कराना वैधानिक रूप से अनिवार्य था।
आरबीआई ने स्पष्ट किया कि ऐसी संस्थाओं को अब ‘गैर-पंजीकृत टाइप-1 एनबीएफसी’ के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।
आरबीआई ने कहा, ”चूंकि ये कंपनियां सार्वजनिक धन का उपयोग किए बिना और आम ग्राहकों से सीधे संपर्क में आए बिना काम करती हैं, इसलिए इनके मामले में प्रणालीगत जोखिम और उपभोक्ता संरक्षण जैसे नियामक मुद्दे प्रासंगिक नहीं रह जाते हैं।”
ये कंपनियां आमतौर पर अपने खुद के कोष से निवेश करती हैं, जिससे वित्तीय स्थिरता को खतरा होने की संभावना बहुत कम होती है।
भाषा पाण्डेय रमण
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