नयी दिल्ली, 20 जनवरी (भाषा) भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र अब एक परिपक्व, भरोसेमंद एवं मूल्य-आधारित दौर में कदम रख चुका है जहां गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं दीर्घकालिक मूल्य के सृजन पर विशेष ध्यान है। उद्योग के विशेषज्ञों ने मंगलवार को यह राय जाहिर की।
इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) की तरफ से यहां आयोजित एक सम्मेलन में शामिल विशेषज्ञों ने कहा कि रियल एस्टेट क्षेत्र के रुझान में आया बदलाव सरकारी सुधारों, नियामकीय स्थिरता, बड़े निवेशकों के बढ़ते भरोसे और घर खरीदारों की बदलती प्राथमिकताओं का परिणाम है।
एक बयान के मुताबिक, सम्मेलन में आईसीसी-एनारॉक की भारतीय आवासीय रियल एस्टेट पर एक रिपोर्ट भी जारी की गई। रिपोर्ट कहती है कि 2025 में देश के शीर्ष सात शहरों में घरों की बिक्री सालाना आधार पर करीब 14 प्रतिशत घटकर 3.96 लाख इकाई रह गई लेकिन कुल लेन-देन मूल्य छह प्रतिशत बढ़कर छह लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया।
विशेषज्ञों ने इसे मात्रा के बजाय मूल्य आधारित वृद्धि की ओर स्पष्ट संकेत बताया।
रिपोर्ट के अनुसार, अब तीन बेडरूम वाले या उससे बड़े घरों की मांग कुल मांग का लगभग 45-50 प्रतिशत हो गई है, जबकि साल 2018 में यह केवल लगभग 30 प्रतिशत थी।
इसके साथ लक्जरी घरों की मांग में भी तेजी आई है। प्रमुख शहरों में चार करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले घर अब कुल बिक्री का लगभग 18–20 प्रतिशत हैं।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि और यूपी रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यूपी-रेरा) के चेयरमैन संजय आर. भूसरेड्डी ने कहा कि आने वाले दो दशकों में रियल एस्टेट उत्तर प्रदेश के साथ पूरे देश की आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख इंजन बनेगा।
भूसरेड्डी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में यह क्षेत्र राज्य की जीडीपी में 13-15 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। उन्होंने परियोजनाओं की समय पर आपूर्ति, उपभोक्ता विश्वास और ‘कारोबारी सुगमता’ पर यूपी रेरा के ध्यान को भी रेखांकित किया।
एनारॉक ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि बढ़ती आय और बदलती जीवनशैली के चलते किफायती आवास की हिस्सेदारी घटी है जबकि लक्जरी एवं अल्ट्रा-लक्जरी खंड में तेज वृद्धि देखी जा रही है।
इस अवसर पर आईसीसी के महानिदेशक राजीव सिंह ने कहा कि देश के शीर्ष शहरों के साथ दूसरी श्रेणी के शहरों में भी मांग बढ़ रही है और अब खरीदार बड़े, सुविधाजनक और ‘वेलनेस’ केंद्रित घरों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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