मुंबई, 17 अगस्त (भाषा) सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने सोमवार को साफ किया कि हाल में शुरू समापन नीलामी सत्र (सीएएस) यानी बाजार बंद होने के बाद शेयरों के अंतिम भाव तय करने की व्यवस्था जारी रहेगी। हालांकि, बाजार नियामक संबंधित पक्षों की ओर से मिले सुझावों का विश्लेषण कर रहा है ताकि सामने आई समस्याओं के समाधान किए जा सकें।
पांडेय ने कहा कि तीन अगस्त से लागू हुई समापन नीलामी सत्र व्यवस्था (सीएएस) में बदलाव को लेकर कुछ प्रतिभागियों ने खासकर सोशल मीडिया मंचों पर अपनी चिंताएं जताई हैं। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि इसमें किस तरह के बदलाव किए जा सकते हैं।
उन्होंने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) प्रवर्तित नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ सिक्योरिटीज मार्केट्स में साइबर सुरक्षा पर आयोजित कार्यक्रम के मौके पर संवाददाताओं से कहा, ‘‘सीएएस निश्चित रूप से जारी रहेगा। हम केवल यह देखेंगे कि क्या कुछ सीमाएं या समस्याएं हैं, जिन्हें सुधारा जा सकता है। निश्चित तौर पर हम उनमें सुधार करेंगे।’’
पांडेय ने कहा कि सेबी हर सुझाव या हर आलोचना पर तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दे सकता। उन्होंने सीएएस को बाजार में एक बड़ा सुधार बताते हुए कहा कि नियामक सभी सुझावों पर विचार कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने खुद सोशल मीडिया के जरिये आए कई सुझाव देखे हैं। हमारी टीम ने उनका अध्ययन किया है और वे बाजार प्रतिभागियों के साथ इस पर चर्चा कर रही हैं।’’
सेबी प्रमुख ने कहा कि नियामक के सामने कुछ निश्चित उद्देश्य हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए यह व्यवस्था लाई गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि सीएएस में भागीदारी बढ़ने के बाद कई चिंताएं अपने आप दूर हो सकती हैं। कई प्रतिभागी अब भी पुरानी मात्रा भारांश औसत कीमत (वीडब्ल्यूएपी) रूपरेखा से जुड़ी प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं, जिसके कारण वे सीएएस का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।
पांडेय ने कहा कि कई अन्य देशों में सीएएस जैसी व्यवस्थाएं पहले से लागू हैं और भारत ने इसे देर से अपनाया है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या बाजार प्रतिभागियों ने नई व्यवस्था को समझने के लिए पर्याप्त प्रयास किए हैं?
उन्होंने कहा, ‘‘जब कोई व्यवस्था वर्षों से चल रही होती है तो लोगों को लगता है कि बदलाव कभी नहीं आएगा। हम नई प्रणाली को सीखने में ऊर्जा नहीं लगाते।’’
सेबी प्रमुख ने यह भी बताया कि सीएएस लागू करने के लिए कई बाजार प्रतिभागियों ने नियामक को बधाई संदेश भेजे हैं। नई व्यवस्था को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया भी मिली है।
भाषा रमण अजय
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