Who is Sharmila Poyami: कभी दहशत का दूसरा नाम थी ‘शर्मिला पोयामी’, आज सुई धागे से पिरो रही परिवार की खुशियां, जानिए कौन है साय सरकार की योजनाओं से प्रभावित होकर नक्सल मांद से लौटने वाली ये 19 साल की युवती

Ads

Who is Sharmila Poyami: कभी दहशत का दूसरा नाम थी 'शर्मिला पोयामी', आज सुई धागे से पिरो रही परिवार की खुशियां, जानिए कौन है साय सरकार की योजनाओं से प्रभावित होकर नक्सल मांद से लौटने वाली ये 19 साल की युवती

  •  
  • Publish Date - April 7, 2026 / 10:02 AM IST,
    Updated On - April 7, 2026 / 10:03 AM IST

Who is Sharmila Poyami: कभी दहशत का दूसरा नाम थी 'शर्मिला पोयामी', आज सुई धागे से पिरो रही परिवार की खुशियां, जानिए कौन है साय सरकार की योजनाओं से प्रभावित होकर नक्सल मांद से लौटने वाली ये 19 साल की युवती / Image: CG DPR

HIGHLIGHTS
  • 19 वर्षीय शर्मिला पोयामी ने मुख्यधारा में लौटीं
  • सिलाई का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बढ़ रहीं
  • भविष्य में परिवार को मजबूत बनाने का लक्ष्य

जगदलपुर:Who is Sharmila Poyami बस्तर संभाग के नक्सल मुक्त घोषित होने के बाद अब हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने वाले युवाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन दिखने लगा है। इसकी सबसे बड़ी मिसाल बीजापुर की शर्मिला पोयामी बनकर उभरी हैं, जिन्होंने कभी हाथों में बंदूक थामी थी, लेकिन आज वे लाइवलीहुड कॉलेज में सुई-धागे से अपने और अपने परिवार के भविष्य के सपने बुन रही हैं।

​हिंसा के रास्ते से मुख्यधारा का सफर

Who is Sharmila Poyami बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक की रहने वाली 19 वर्षीय शर्मिला कभी भैरमगढ़ एरिया कमेटी की सक्रिय सदस्य थीं। गुरिल्ला युद्ध और हथियारों का प्रशिक्षण लेने वाली शर्मिला को जल्द ही अहसास हो गया कि प्रगति का मार्ग बंदूक से नहीं, बल्कि शांति और शिक्षा से निकलता है। इसी संकल्प के साथ उन्होंने 07 फरवरी 2026 को आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का निर्णय लिया।

​कौशल विकास से आत्मनिर्भरता की ओर

राज्य शासन की पुनर्वास नीति के तहत शर्मिला को दंतेवाड़ा के लाइवलीहुड कॉलेज में प्रवेश दिलाया गया। बीते 45 दिनों से वे यहां सिलाई का गहन प्रशिक्षण ले रही हैं। अब वे आधुनिक परिधान जैसे सूट और ब्लाउज सिलने की बारीकियां सीख रही हैं। प्रशिक्षण के बाद उनका लक्ष्य अपने गाँव लौटकर सिलाई केंद्र खोलना और अपनी 4 एकड़ पुश्तैनी जमीन पर आधुनिक खेती (टमाटर, मूली व भाजियाँ) कर परिवार को आर्थिक संबल प्रदान करना है।

​सुविधाओं ने बदला नजरिया

​शर्मिला ने बताया कि मुख्यधारा में लौटने के बाद उन्हें पहली बार शासन की ओर से इतनी बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं, ​पौष्टिक आहाररू कॉलेज में नियमित रूप से अंडा, मछली, चिकन और हरी सब्जियां दी जा रही हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य में बड़ा सुधार हुआ है। ​सक्रिय सहभागितारू बढ़ते आत्मविश्वास का ही परिणाम है कि उन्होंने हाल ही में जगदलपुर में आयोजित मैराथन दौड़ में भी हिस्सा लिया। ​पारिवारिक प्रेरणा- शर्मिला की दीदी मुड़ो पोयामी (पूर्व नक्सल सदस्य) भी मुख्यधारा में लौटकर आत्मनिर्भरता की राह पर हैं।

​गांव के विकास की उम्मीद

शिक्षा और कौशल की ताकत को समझने के बाद शर्मिला अब अपने क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं के प्रति भी सजग हैं। वे चाहती हैं कि उनके गाँव की कच्ची सड़कों और पेयजल की समस्याओं का जल्द निराकरण हो ताकि विकास की यह लहर सुदूर अंचलों तक पहुँचे। ​शर्मिला पोयामी का यह संघर्षपूर्ण सफर हिंसा से विकास की ओर बढ़ते नए छत्तीसगढ़ की एक सशक्त पहचान बन गया है।

ये भी पढ़ें

शर्मिला पोयामी कौन हैं?

शर्मिला पोयामी बीजापुर जिले की 19 वर्षीय युवती हैं, जो पहले नक्सल संगठन से जुड़ी थीं, लेकिन अब आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट आई हैं।

शर्मिला ने नक्सल संगठन क्यों छोड़ा?

उन्हें यह अहसास हुआ कि विकास और बेहतर भविष्य का रास्ता हिंसा नहीं बल्कि शिक्षा और शांति से होकर जाता है, इसलिए उन्होंने आत्मसमर्पण किया।

आत्मसमर्पण के बाद शर्मिला क्या कर रही हैं?

वे दंतेवाड़ा के लाइवलीहुड कॉलेज में सिलाई का प्रशिक्षण ले रही हैं और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

सरकार ने उन्हें क्या सुविधाएं दी हैं?

राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत उन्हें प्रशिक्षण, पौष्टिक आहार और अन्य जरूरी सुविधाएं दी जा रही हैं, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।

शर्मिला का आगे का लक्ष्य क्या है?

शर्मिला अपने गांव में सिलाई केंद्र खोलना चाहती हैं और अपनी जमीन पर आधुनिक खेती कर परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना चाहती हैं।