भारत-जापान मित्रता की जड़ें प्राचीन सांस्कृतिक विरासत में गहराई से जुड़ी हुई हैं : मुख्यमंत्री साय

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भारत-जापान मित्रता की जड़ें प्राचीन सांस्कृतिक विरासत में गहराई से जुड़ी हुई हैं : मुख्यमंत्री साय

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  • Publish Date - September 15, 2026 / 12:09 AM IST,
    Updated On - September 15, 2026 / 12:09 AM IST

रायपुर, 14 सितंबर (भाषा) छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि भारत और जापान की मित्रता की जड़ें दोनों देशों की प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत में गहराई से जुड़ी हुई हैं।

अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि मुख्यमंत्री साय से रविवार देर रात जापान की एहिमे यूनिवर्सिटी से आए 17 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की।

भारत-जापान छात्र आदान-प्रदान कार्यक्रम के अंतर्गत तीन दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण पर छत्तीसगढ़ पहुंचे विद्यार्थियों से मुख्यमंत्री साय ने संवाद किया। इस दौरान भारत और जापान के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों, बौद्ध विरासत, शिक्षा, अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, स्टार्टअप तथा दोनों देशों के युवाओं के बीच बढ़ते संवाद सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।

साय ने जापानी छात्र-छात्राओं का छत्तीसगढ़ की धरती पर स्वागत करते हुए कहा कि भारत और जापान की मित्रता की जड़ें दोनों देशों की प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत में गहराई से जुड़ी हुई हैं। समय के साथ यह संबंध संस्कृति और आध्यात्मिकता से आगे बढ़कर शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, नवाचार और आर्थिक सहयोग के अनेक क्षेत्रों तक विस्तृत हुआ है।

साय ने कहा कि भारत और जापान आज परंपरा और आधुनिकता के सुंदर समन्वय के साथ विश्व के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और सम्मान की मजबूत नींव है। युवाओं तथा विद्यार्थियों के बीच इस प्रकार के शैक्षणिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से यह संबंध आने वाली पीढ़ियों में और अधिक मजबूत होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत भगवान बुद्ध की भूमि है। भगवान बुद्ध के शांति, करुणा, मैत्री और मानव कल्याण के संदेश ने दुनिया के अनेक देशों को प्रभावित किया और जापान की संस्कृति में भी बौद्ध दर्शन की गहरी छाप दिखाई देती है। यही साझा आध्यात्मिक विरासत भारत और जापान को एक विशिष्ट सांस्कृतिक सूत्र में जोड़ती है।

उन्होंने जापानी विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध पुरातात्विक विरासत की जानकारी देते हुए सिरपुर, मैनपाट और भोंगापाल जैसे महत्वपूर्ण स्थलों का उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महानदी के तट पर स्थित सिरपुर छत्तीसगढ़ की प्राचीन सभ्यता, कला, स्थापत्य और बौद्ध विरासत का अद्भुत केंद्र है। यहां प्राप्त पुरातात्विक अवशेष प्रदेश के गौरवशाली इतिहास और विभिन्न संस्कृतियों के समन्वय की कहानी बताते हैं।

साय ने कहा, ‘‘राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, पुरातात्विक और सांस्कृतिक धरोहर को देश-दुनिया में नयी पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। सिरपुर को विश्वस्तरीय ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में भी योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि दुनिया के विभिन्न देशों से आने वाले विद्यार्थी, शोधार्थी और पर्यटक छत्तीसगढ़ आएं, यहां की विरासत को जानें और प्रदेश के साथ ज्ञान एवं संस्कृति का एक स्थायी संबंध स्थापित करें।’’

अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री साय ने अपनी जापान यात्रा से जुड़े अनुभव भी विद्यार्थियों के साथ साझा किए। उन्होंने जापान की अनुशासित कार्यसंस्कृति, तकनीकी प्रगति और अपनी परंपराओं के प्रति सम्मान की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान ने आधुनिक विज्ञान और तकनीक में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए अपनी सांस्कृतिक पहचान को जिस प्रकार सहेजकर रखा है, वह प्रेरणादायी है।

इस दौरान जापानी छात्र प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने मुख्यमंत्री के साथ अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के अनुभव भी साझा किए। विद्यार्थियों ने बताया कि यहां की संस्कृति, परंपराओं और लोगों के सहज एवं आत्मीय व्यवहार ने उन्हें विशेष रूप से प्रभावित किया।

विद्यार्थियों ने भारतीय खान-पान की भी प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान उन्हें गणेश उत्सव की परंपराओं और उसके सांस्कृतिक महत्व को करीब से जानने का अवसर मिला।

अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान जापानी छात्र प्रतिनिधिमंडल ने एनआईटी रायपुर के विभिन्न रिसर्च सेंटर और इन्क्यूबेशन सेंटर का भी भ्रमण किया। विद्यार्थियों ने वहां संचालित स्टार्टअप की गतिविधियों, अनुसंधान परियोजनाओं और विकसित की जा रही नई तकनीकों की जानकारी ली।

भाषा संजीव गोला

गोला