छत्तीसगढ़ में श्रम संगठनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का मिला-जुला असर

छत्तीसगढ़ में श्रम संगठनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का मिला-जुला असर

छत्तीसगढ़ में श्रम संगठनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का मिला-जुला असर
Modified Date: February 12, 2026 / 04:41 pm IST
Published Date: February 12, 2026 4:41 pm IST

रायपुर, 12 फरवरी (भाषा) केंद्र सरकार की चार नई श्रम संहिताओं और कथित श्रमिक विरोधी नीतियों के विरोध में आहूत श्रमिक संगठनों की एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का छत्तीसगढ़ में बृहस्पतिवार को मिला-जुला असर दिखा।

कर्मचारियों के हड़ताल में शामिल होने के कारण कई राष्ट्रीयकृत बैंक बंद रहे। बीमा कंपनियों और डाकघरों के कर्मचारियों के साथ-साथ मजदूरों और किसानों ने भी आंदोलन में भाग लिया, जिससे उनसे संबंधित क्षेत्रों में कामकाज प्रभावित हुआ।

खनिज-समृद्ध राज्य में खनन गतिविधियां आंशिक रूप से प्रभावित हुईं।

हालांकि, परिवहन सेवाओं का संचालन सामान्य रहा और दुकानें, बाजार और अधिकांश व्यावसायिक प्रतिष्ठान खुले रहे। दुर्ग जिले सहित कई क्षेत्रों में सामान्य जन-जीवन काफी हद तक अप्रभावित रहा और भिलाई इस्पात संयंत्र में कामकाज सामान्य रूप से जारी रहा।

श्रमिक संगठनों के संयुक्त मंच के संयोजक धर्मराज महापात्रा ने बताया कि विभिन्न श्रमिक संगठनों, स्वतंत्र संघों और कुछ राज्य सरकार के विभागों से संबद्ध हजारों कर्मचारियों और श्रमिकों ने जिलों में विरोध प्रदर्शन किया और रैलियां निकालीं।

प्रदर्शनकारी रायपुर के पंडरी स्थित एलआईसी मंडल कार्यालय के बाहर एकत्र हुए।

केंद्रीय श्रमिक संगठनों के संयुक्त मंच ने केंद्र सरकार की ‘मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और राष्ट्र विरोधी कॉरपोरेट समर्थक नीतियों के विरोध में इस हड़ताल का आह्वान किया था। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने भी हड़ताल को अपना समर्थन दिया है।

महापात्रा ने आरोप लगाया कि नई श्रम संहिताएं ‘व्यापार करने में आसानी’ के नाम पर श्रमिकों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों की कीमत पर कॉरपोरेट जगत को लाभ पहुंचाती हैं।

राजनांदगांव जिले में भी प्रदर्शन हुए, जहां श्रमिक संगठनों और किसान समूहों ने विरोध जताया। कोरबा में स्थानीय श्रमिक संगठन के नेता वीएम मनोहर ने बताया कि साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की कोयला खदानों के कई कर्मचारियों ने भी विरोध प्रदर्शन में भाग लिया।

अधिकारियों ने बताया कि राज्य के किसी भी हिस्से से कोई अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है।

हड़ताल का आह्वान करने वाले केंद्रीय श्रमिक संगठनों के संयुक्त मंच ने दावा किया है कि आंदोलन के लिए लगभग 30 करोड़ श्रमिकों को संगठित किया गया है।

उनकी तत्कालिक मांगों में चार श्रम संहिताओं और नियमों को रद्द करना, बीज विधेयक और विद्युत संशोधन विधेयक के मसौदे को वापस लेना शामिल है। उनकी मांगों में ‘भारत में परिवर्तन के लिए परमाणु ऊर्जा का सतत दोहन और विकास (शांति) अधिनियम’ को वापस लेना भी शामिल है। श्रमिक संगठन ‘विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन-ग्रामीण’ (वीबी-जी राम जी) को रद्द करके मनरेगा को भी बहाल करने की मांग कर रहे हैं।

भाषा संतोष पवनेश

पवनेश


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