नयी दिल्ली, 11 जून (भाषा) सेना को एक प्रौद्योगिकी कंपनी ने 106 टर्बोजेट-चालित ‘कामिकेज’ ड्रोन सौंपे हैं। इन्हें दुश्मन के इलाके में अंदर तक जाकर अहम ठिकानों को निशाना बनाने और विद्युत-चुंबकीय वातावरण में काम करने के लिए विकसित किया गया है। एक बयान में यह जानकारी दी गई।
रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी एसएमपीपी ने बृहस्पतिवार को बताया कि 180 किलोमीटर तक की मारक क्षमता और 450 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार वाला ड्रोन — अग्निवेग — अहम सैन्य अवसंरचना, साजो-सामान केंद्र, कमांड सेंटर, रडार और अन्य रणनीतिक ठिकानों पर खुद से सटीक हमले करने में सक्षम है।
बयान के अनुसार, ‘‘लंबी दूरी तक की मारक क्षमता, सटीक हमले की काबिलियत और बहुत तेज गति से हमला करने की खूबी के साथ, यह प्रणाली भारतीय सेना को संवेदनशील लक्ष्यों पर हमला करने के लिए एक लचीला और किफायती विकल्प देती है। साथ ही यह ड्रोन सैनिकों के लिए जोखिम भी कम करता है।’’
एसएमपीपी के अनुसार, इस ड्रोन को विद्युत-चुंबकीय वातावरण में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह दुश्मन द्वारा भ्रमित करने जैसी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध शैलियों का इस्तेमाल करने के बावजूद अपना मिशन जारी रख सकता है।
एसएमपीपी ने भारतीय सेना को 100 जेट-आधारित अग्निवेग अभियानगत ड्रोन और छह प्रशिक्षण ड्रोन सौंपे हैं।
कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और निदेशक आशीष कंसल ने कहा, ‘‘छह महीने के कम समय में भारतीय सेना को अग्निवेग की आपूर्ति सफलतापूर्वक करना एसएमपीपी और भारत के स्वदेशी रक्षा निर्माण परिवेश के लिए एक अहम उपलब्धि है।’’
भाषा सुभाष पवनेश
पवनेश