एक महिला अपने स्त्रीधन की पूर्ण रूप से मालिक: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

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एक महिला अपने स्त्रीधन की पूर्ण रूप से मालिक: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

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  • Publish Date - March 31, 2026 / 11:03 PM IST,
    Updated On - March 31, 2026 / 11:03 PM IST

प्रयागराज, 31 मार्च (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि एक महिला अपने स्त्रीधन की पूर्ण रूप से मालिक है और इसे ले जाने के लिए कानूनी रूप से विवाहित महिला पर कथित विश्वासघात के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

अदालत ने अनामिका तिवारी और चार अन्य लोगों द्वारा दायर याचिका स्वीकार करते हुए समन और उनके खिलाफ दर्ज किये गये आपराधिक मामले को रद्द कर दिया।

न्यायमूर्ति चवन प्रकाश ने हाल ही में दिए आदेश में कहा कि शादी के समय एक महिला को दी गई संपत्ति उसका स्त्रीधन है और यह पति व पत्नी की संयुक्त संपत्ति नहीं बन जाती।

अदालत ने कहा कि एक पत्नी को अपनी खुशी से इस संपत्ति को निस्तारित करने का पूरा अधिकार है हालांकि पति संकटकाल में इसका उपयोग कर सकता है।

याचिकाकर्ता महिला का विवाह अप्रैल, 2012 में हुआ था।

शादी के बाद उसने अपने पति और ससुराल के लोगों के खिलाफ दहेज की मांग को लेकर प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

इस मामले में आरोप पत्र दिसंबर, 2018 में दाखिल किया गया था।

बाद में महिला के पति ने एक शिकायत में आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी और अन्य लोग सितंबर, 2018 में उसके घर में घुसे और 6,400 रुपये नकद, करीब डेढ़ लाख रुपये मूल्य के आभूषण और कुछ घरेलू सामान उठा ले गए।

इस शिकायत और गवाहों के बयान के आधार पर मजिस्ट्रेट ने महिला और उसके परिजनों को मुकदमे का सामना करने के लिए समन जारी किया, जिसे चुनौती देते हुए महिला ने मौजूदा याचिका दायर की।

अदालत ने तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 405 और 406 की समीक्षा करते हुए कहा कि अगर कोई संपत्ति किसी व्यक्ति को सौंपी जाती है और वह व्यक्ति इसका दुरुपयोग करता है या इसे अपने लिए इस्तेमाल करता है तो विश्वासघात का अपराध बनता है।

अदालत ने कहा कि इस मामले में चूंकि पत्नी अपने स्त्रीधन की पूर्ण स्वामिनी है इसलिए कथित तौर पर अपना आभूषण ले जाने के लिए याचिकाकर्ता के खिलाफ धारा 406 के तहत कोई अपराध नहीं बनता।

भाषा सं राजेंद्र जितेंद्र

जितेंद्र