नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) साहित्योत्सव के दूसरे दिन मंगलवार को भारतीय भाषाओं के कुल 24 लेखकों और कवियों को साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
कमानी सभागार में आयोजित समारोह में पुरस्कार पाने वालों में अंग्रेजी लेखक और पूर्व राजदूत नवतेज सरना शामिल थे, जिन्हें उनके उपन्यास ‘क्रिमसन स्प्रिंग’ के लिए पुरस्कार मिला और हिंदी लेखिका ममता कालिया को उनके संस्मरण ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए पुरस्कार दिया गया।
पुरस्कार विजेताओं को एक पट्टिका, शॉल और एक लाख रुपये की राशि प्रदान की गई।
कवि और साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा कि योग्य व्यक्तियों को सम्मानित करना समाज का कर्तव्य है, अन्यथा समाज मूल्यों से विरक्त हो जाएगा।
तिवारी ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘योग्य व्यक्तियों को पुरस्कार देना और सम्मानित करना समाज का दायित्व है। जो समाज योग्य व्यक्तियों का सम्मान नहीं करता, वह धीरे-धीरे मूल्यों से विरक्त हो जाता है और अंततः ढह जाता है। चूंकि समाज स्वयं एक अमूर्त अवधारणा है, इसलिए इसके प्रतिनिधियों पर यह दायित्व आता है।’’
उन्होंने कहा कि साहित्य की रचना करने वाले सम्मान के पात्र हैं क्योंकि वे केवल अपनी अभिव्यक्ति के माध्यम से समाज की सेवा करते हैं।
अन्य पुरस्कार विजेताओं में प्रसून बंद्योपाध्याय शामिल हैं, जिन्हें बांग्ला में ‘श्रेष्ठ कविता’ के लिए सम्मानित किया गया। योगेश वैद्य को गुजराती में ‘भट्ठखाडकी’, अमरेश नुगडोनी को कन्नड़ में ‘दादा सीरिसु तंदे’ और एन. प्रभाकरण को मलयालम में ‘मायामनुष्यर’ के लिए पुरस्कार मिला।
इसके अलावा, राजू बाविस्कर को मराठी में ‘कल्याणील्या रेशा’, जिंदर को पंजाबी में ‘सेफ्टी किट’, जितेंद्र कुमार सोनी को राजस्थानी में ‘भरखमा’ और सा. तमिलसेलवन को तमिल में ‘तमिज सिरुकथैयिन थडंगल’ के लिए सम्मानित किया गया।
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