ठाणे, 10 मई (भाषा) महाराष्ट्र में ठाणे की एक अदालत ने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत डकैती के आरोप से दो लोगों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष उन्हें अपराध से जोड़ने वाले ‘पर्याप्त या पुष्टिकारक साक्ष्य’ प्रदान करने में विफल रहा।
विशेष मकोका अदालत के न्यायाधीश वी जी मोहिते ने शुक्रवार को अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि आरोपी ने संगठित अपराध सिंडिकेट के सदस्य के रूप में आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए कथित अपराध किया था।
यह मामला 11 सितंबर, 2022 को ठाणे जिले के कल्याण क्षेत्र में एक महिला की सोने की चेन कथित तौर पर छीन लिये जाने से जुड़ा है।
पुलिस ने आरोपियों– जयकुमार कोमल राठौड़ (38) और गाजी दारा ईरानी उर्फ सैयद (33) के आपराधिक इतिहास के आधार पर मकोका लगाया, लेकिन अदालत ने इस विशिष्ट घटना के संबंध में पेश किये गये सबूतों को गंभीर रूप से नाकाफी पाया।
अदालत ने कहा, “अभियोजन पक्ष आरोपियों की पहचान को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। निर्धारित नियमावली के अनुसार पहचान परेड नहीं की गई, जिससे अदालत में पहचान संदिग्ध हो जाती है।’’
अदालत ने कहा, ‘‘अभियोजन पक्ष स्वतंत्र और विश्वसनीय पंच गवाहों के माध्यम से आरोपियों से कथित चोरी की संपत्ति (सोने की चेन) की बरामदगी को साबित नहीं कर पाया है। गवाह मुकर गए हैं और उनकी गवाही भरोसेमंद नहीं है।”
न्यायाधीश ने आदेश दिया कि यदि किसी अन्य मामले में आरोपियों की आवश्यकता न हो तो उन्हें तत्काल रिहा कर दिया जाए।
भाषा राजकुमार सुरेश
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