एएमएमके प्रमुख ने मेकेदातु परियोजना पर कर्नाटक के रुख की आलोचना की

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एएमएमके प्रमुख ने मेकेदातु परियोजना पर कर्नाटक के रुख की आलोचना की

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  • Publish Date - May 22, 2026 / 04:39 PM IST,
    Updated On - May 22, 2026 / 04:39 PM IST

चेन्नई, 22 मई (भाषा) अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम (एएमएमके) प्रमुख टी.टी.वी. दिनाकरन ने शुक्रवार को कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की उस टिप्पणी को “अहंकार भरी” बताया जिसमें उन्होंने कहा था कि तमिलनाडु को कावेरी नदी पर बने मेकेदातु बांध का विरोध करने का “कोई अधिकार नहीं” है।

उन्होंने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि मेकेदातु जलाशय के निर्माण पर कर्नाटक का लगातार जोर देने से कावेरी डेल्टा का बड़ा हिस्सा “सूख जाएगा” और किसानों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी।

विभिन्न रिपोर्टों का हवाला देते हुए, दिनाकरन ने कहा कि कर्नाटक सरकार जल्द ही बांध के लिए एक संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) प्रस्तुत करेगी।

उन्होंने कहा कि, हालांकि उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि कावेरी नदी पर बांध बनाने के लिए प्रभावित राज्यों की सहमति आवश्यक है, और कावेरी प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा तमिलनाडु को समय पर पानी का उसका उचित हिस्सा दिया जाना सुनिश्चित करने के लिए बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद, कर्नाटक सरकार एकतरफा कार्रवाई करने पर अड़ी हुई है।

दिनाकरन ने आरोप लगाया कि इस जल्दबाजी से तमिलनाडु के किसानों के जीवन और आजीविका को खतरा है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने राजनीतिक सत्ता हासिल करने की होड़ में तमिलनाडु के अधिकारों को कर्नाटक सरकार के पास गिरवी रख दिया था।

उन्होंने कहा कि किसानों और आम जनता के बीच अब यह संदेह और भय पैदा हो गया है कि कांग्रेस पार्टी के समर्थन से सत्ता में आई तमिलनाडु की मौजूदा सरकार राजनीतिक सत्ता बरकरार रखने के लिए कावेरी मुद्दे पर राज्य के अधिकारों को भी त्याग सकती है।

उन्होंने तमिलनाडु सरकार से राज्य के अधिकारों और किसानों के कल्याण को मान्यता देने का आग्रह करते हुए, कावेरी नदी पर मेकेदातु बांध के निर्माण के कर्नाटक सरकार के प्रयास को जल्द से जल्द रोकने का आह्वान किया।

कर्नाटक ने कावेरी नदी पर मेकेदातु में एक संतुलन जलाशय के निर्माण का प्रस्ताव रखा है ताकि वह अपनी पेयजल और बिजली उत्पादन की जरूरतों को पूरा कर सके।

तमिलनाडु ने इस परियोजना का विरोध करते हुए कहा है कि इसके लागू होने पर उसके हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

भाषा तान्या प्रशांत

प्रशांत