अरुणाचल बाढ़: चार की मौत; 90,000 प्रभावित; मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों ने किया हवाई सर्वेक्षण

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अरुणाचल बाढ़: चार की मौत; 90,000 प्रभावित; मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों ने किया हवाई सर्वेक्षण

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  • Publish Date - June 30, 2026 / 09:19 PM IST,
    Updated On - June 30, 2026 / 09:19 PM IST

ईटानगर, 30 जून (भाषा) अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ की स्थिति और खराब हो गई है। एक और व्यक्ति की मौत के साथ राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या चार हो गई है, जबकि 21 लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि राज्य के सभी 28 जिलों में कुल 90,499 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (एसईओसी) की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सात दिनों में भारी बारिश के कारण अचानक बाढ़ आ गई और भूस्खलन हुआ, जिससे घर, सड़कें, पुल और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है और दो लोग लापता भी हैं।

मुख्यमंत्री पेमा खांडू और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं किरेन रीजीजू ने बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित केयी पन्योर जिले का दिन में हवाई और जमीनी सर्वेक्षण किया।

इन नेताओं का अरुणाचल प्रदेश का दौरा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा राज्य भर में बाढ़ की स्थिति का जायज़ा लेने के लिए खांडू से फोन पर बात करने के एक दिन बाद हुआ।

सोमवार को बाढ़ से कम से कम 12 जिले प्रभावित हुए थे।

एसईओसी की रिपोर्ट के अनुसार, 24 जून से पूर्वोत्तर राज्य के 202 सर्किल के तहत आने वाले 251 गांवों में लगभग 90,499 लोग प्रभावित हुए हैं।

अपर सियांग ज़िले में सबसे ज़्यादा 47,357 लोग प्रभावित पाए गए, जबकि सियांग में 23,715, क्रा दादी में 8,171 और ईस्ट कामेंग में 5,895 लोग प्रभावित हैं।

देर से मिली एक रिपोर्ट के अनुसार, 28 जून को अंजॉ ज़िले के सारती गांव में भूस्खलन से एक व्यक्ति की मौत हो गई।

तीन अन्य मौतें 24 जून को केयी पन्योर ज़िले के पोसा में अचानक आई बाढ़ के कारण हुईं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि केयी पन्योर आपदा में 21 लोग घायल हुए, जबकि दो महिलाएं अभी भी लापता हैं।

खांडू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘हालिया आपदा से उत्पन्न बाढ़ की स्थिति और नुकसान का आकलन करने के लिए अरुणाचल प्रदेश की यात्रा पर आए माननीय केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी और श्री किरेन रीजीजू जी का हार्दिक अभिनंदन किया गया।’’

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्रियों को राज्य में भेजने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को दिल से धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने ज़मीनी हालात का व्यक्तिगत रूप से जायज़ा लेने के लिए दो केंद्रीय मंत्रियों – श्री शिवराज सिंह चौहान जी और श्री किरेन रीजीजू जी को भेजने में तत्परता दिखाई और सहयोग किया।’’

अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री एवं राज्य से भाजपा सांसद रीजीजू ने बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लिया, राहत कार्यों की समीक्षा की और प्रभावित इलाकों में पुनर्वास के प्रयासों की जानकारी लेने के लिए राज्य के अधिकारियों से बातचीत की।

चौहान ने बाद में कहा कि दोनों मंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर राज्य में आए थे ताकि जमीनी स्थिति का आकलन किया जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद मिले।

उन्होंने कहा कि धान, संतरे और केले सहित खड़ी फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है, जिससे किसानों की आजीविका बुरी तरह प्रभावित हुई है।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा, ‘हमने यहां के अपने भाइयों और बहनों से बात की है और तबाही का मंजर देखा है। नुकसान बहुत बड़ा है।’

एसईओसी की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य भर में 342 कच्चे घर, 82 पक्के घर और 37 झोपड़ियां क्षतिग्रस्त हुई हैं। इनमें 130 पोल्ट्री पक्षियों, 613 छोटे जानवरों और छह बड़े जानवरों की मौत की भी जानकारी दी गई है।

मॉनसून के कहर से बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है; 80 सड़कें, 12 पुल, 18 पुलिया, 147 जलापूर्ति योजनाएं, 21 बिजली लाइनें, 60 बिजली के खंभे, बाढ़ से बचाव की सात दीवारें, चार जलविद्युत परियोजनाएं, चार सरकारी इमारतें और दो अस्पताल प्रभावित हुए हैं।

केयी पन्योर, पापुम पारे, पूर्वी सियांग, ऊपरी सियांग, पक्के केसांग, निचली दिबांग घाटी और क्रा दादी में कई सड़कें बंद हैं या उनकी मरम्मत का काम चल रहा है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बारिश से जुड़ी आपदाओं के कारण 1,010 हेक्टेयर वन क्षेत्र और 312.2 हेक्टेयर कृषि और बागवानी भूमि प्रभावित हुई है।

एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, राज्य पुलिस, भारतीय वायु सेना, नागरिक उड्डयन के हेलीकॉप्टर और स्थानीय स्वयंसेवकों की तैनाती के साथ बचाव और राहत कार्य जारी हैं।

केयी पन्योर और निचली दिबांग घाटी से फंसे हुए लोगों को बचाया गया है, जबकि सबसे बुरी तरह प्रभावित इलाकों में राहत शिविर खोले गए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रभावित परिवारों को अनाज, दवाइयां और दूसरी जरूरी चीज़ें जैसी राहत सामग्री बांटी जा रही है।

राज्यपाल के.टी. परनाइक ने मंगलवार को प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए ‘‘पूरे राज्य’’ के स्तर पर मिलकर काम करने की जरूरत पर ज़ोर दिया।

दिन में पहले लोक भवन में हुई एक बैठक में, मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने राज्यपाल को राज्य में बाढ़ की मौजूदा स्थिति और प्रभावित लोगों के लिए किए जा रहे राहत और सुरक्षा उपायों के बारे में जानकारी दी।

परनाइक ने बचाव, राहत और पुनर्वास के कामों में एसडीआरएफ, जिला प्रशासन, लोक निर्माण, नागरिक उड्डयन और आपदा प्रबंधन विभागों, इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी, स्वयंसेवकों और स्थानीय लोगों की समर्पित सेवाओं की भी तारीफ की।

भाषा

सुरेश माधव

माधव

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