नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मंगलवार को अपने मासिक पूर्वानुमान में कहा कि जुलाई के दौरान भारत में मासिक औसत बारिश सामान्य से कम रहने की उम्मीद है।
मौसम विभाग ने बताया कि जुलाई में लंबी अवधि के औसत (एलपीए) (1971-2020) की 94 प्रतिशत बारिश होने की संभावना है। भारत में जुलाई में एलपीए बारिश लगभग 280.4 मिमी होती है।
एलपीए किसी विशेष क्षेत्र में एक निश्चित अवधि, जैसे कि एक महीने या एक मौसम के लिए दर्ज की गयी वर्षा को संदर्भित करता है, जिसका औसत आमतौर पर 30 से 50 वर्षों की लंबी अवधि में निकाला जाता है।
आईएमडी ने कहा है कि उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत, पूर्वी-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र के कुछ हिस्सों में सामान्य से ज्यादा बारिश होने की संभावना है।
आईएमडी के मौसम विज्ञान महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने एक बयान में कहा, “जुलाई के दौरान देश के ज़्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है, सिवाय उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत, पूर्वी-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र के कुछ इलाकों के, जहां सामान्य या उससे ज़्यादा बारिश होने की उम्मीद है।”
जून में पूरे भारत में बारिश में लगभग 40 प्रतिशत की कमी देखी गई, जिसमें मध्य भारत सबसे ज़्यादा प्रभावित रहा और वहां 50.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। 1901 के बाद से जून के महीने में देश में यह पांचवीं सबसे कम (99.5 मिमी) बारिश थी।
महापात्र के अनुसार, मॉनसून सीजन के दौरान सामान्य से कम बारिश पांच मुख्य कारणों से हुई।
सबसे पहले, मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (एमजेओ) का प्रतिकूल चरण; यह हवा, बादलों और दबाव का एक गतिशील तंत्र है जो भूमध्य रेखा के चारों ओर घूमते हुए बारिश लाता है।
दूसरा कारण, जून के दौरान कोई कम दबाव वाली प्रणाली (एलपीएस) नहीं बनी। एलपीएस असल में ऐसे इलाके होते हैं जहां वायुमंडलीय दबाव आस-पास के इलाकों की तुलना में कम होता है।
तीसरा, जून के दौरान बनी ज़्यादातर तूफान प्रणाली उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर मुड़ गईं, जिसके कारण हिंद महासागर क्षेत्र में एलपीएस (कम दबाव का क्षेत्र) कमजोर पड़ गया।
चौथा, इस महीने अल-नीनो की स्थितियों के उभरने से भी बारिश की गतिविधि पर बुरा असर पड़ा।
अल नीनो, जिसके कारण भारत में मॉनसून की बारिश कम होती है, के बारे में यह तो पता है कि इसका धरती पर तापमान बढ़ाने वाला असर होता है, लेकिन इसके उलट ला नीना का असर आमतौर पर तापमान को कम करने वाला होता है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के बारे में बात करते हुए महापात्र ने बताया कि अगले 2-3 दिनों में इसके उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के बाकी हिस्सों के साथ-साथ गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के और इलाकों में आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल हैं।
इस दौरान, मॉनसून के पूरे दमन और दीव, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब के ज़्यादातर हिस्सों और राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी आगे बढ़ने की संभावना है।
भाषा प्रशांत नरेश
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