Baba Bageshwar Statement on Shivaji Maharaj || Image- IBC24 News File
नागपुर: महाराष्ट्र में विरोध के बीच बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज पर अपनी टिप्पणी को लेकर रविवार को “गहरा खेद” जताते हुए कहा कि उनके बयान को सोशल मीडिया पर तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। (Baba Bageshwar Statement on Shivaji Maharaj) नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान शास्त्री के उस कथित बयान के बाद विवाद खड़ा हो गया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि शिवाजी महाराज युद्ध से थककर अपनी जिम्मेदारियां छोड़ना चाहते थे और अपने ‘गुरु’ समर्थ रामदास के पास मुकुट लेकर पहुंचे थे।
नागपुर में रविवार को संवाददाता सम्मेलन में शास्त्री ने कहा कि शिवाजी महाराज के बारे में उनकी बातों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। आध्यात्मिक उपदेशक ने कहा कि उन पर शिवाजी महाराज का अपमान करने के आरोप से उन्हें पीड़ा हुई है। शास्त्री ने कहा, “उनका अपमान करना तो दूर, मैं सपने में भी किसी को छत्रपति शिवाजी महाराज की आलोचना करते नहीं देख सकता।” उन्होंने कहा कि ‘हिंदू राष्ट्र’ का उनका संकल्प ‘हिंदवी स्वराज’ की अवधारणा से प्रेरित है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अपने वक्तव्य में वह शिवाजी महाराज की संतों, महंतों और देवी तुलजाभवानी के प्रति श्रद्धा को रेखांकित करना चाहते थे। उन्होंने यह भी कहा कि समर्थ रामदास ने शिवाजी महाराज द्वारा दिए गए मुकुट को वापस उनके सिर पर रखकर उन्हें शासन जारी रखने की सलाह दी थी। शास्त्री ने कहा, “कुछ लोगों ने मेरी बातों को गलत तरीके से पेश किया। यदि मेरी बातों से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो मैं इसके लिए बेहद क्षमाप्रार्थी हूं। (Baba Bageshwar Statement on Shivaji Maharaj) मैं चाहता हूं कि मेरे बयान को गलत ढंग से प्रस्तुत न किया जाए, क्योंकि मैं शिवाजी महाराज के लिए जीता और मरता हूं।” अपने उस विवादित बयान का उल्लेख करते हुए, जिसमें लोगों से चार बच्चे पैदा करने और उनमें से एक को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को समर्पित करने की बात कही गई थी, धीरेंद्र शास्त्री ने स्पष्ट किया कि उनका आशय बच्चों को ‘संघ जैसे कट्टर राष्ट्रवादी’ और सनातनी विचारधारा वाला बनाने से था।
पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के बयान के बाद महाराष्ट्र के नेताओं ने उन्हें अड़े हाथों लिया है। उन्होंने बाबा के बयान पर घोर आपत्ति भी जाहिर की है। बाबा के दावे का खंडन करते हुए एमपीसीसी प्रमुख हर्षवर्धन सपकाल ने कहा, “महाराष्ट्र की जनता को अब धीरेन्द्र शास्त्री जैसे इन पाखंडी ‘बाबाओं’ को देश से बाहर निकाल देना चाहिए। ये वे लोग हैं जिन्हें आरएसएस-भाजपा ने पाला-पोसा है और जो गौशाला से महाराष्ट्र आकर हमारे ‘महाराष्ट्र धर्म’ को अपवित्र करते हैं।” सपकाल ने कहा कि आरएसएस-भाजपा की मनुवादी विचारधारा छत्रपति शिवाजी की विरासत और उनके द्वारा स्थापित ‘हिंदवी स्वराज’ से हमेशा आहत रही है।
सपकाल ने मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि वे धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ मामला दर्ज करें और उसे गिरफ्तार करें। सपकाल ने कहा, “आज ये पाखंडी लोग हमारे छत्रपति शिवाजी, जो इस मराठी धरती के प्रेरणास्रोत हैं, का अपमान करने के लिए ऐसे लोगों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वह (बाबा) तो बस एक रटने वाला तोता है। जब उन्होंने यह बयान दिया, तब आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी मंच पर मौजूद थे। फिर भी उन्होंने इस विकृत बाबा को नहीं रोका। इससे स्पष्ट रूप से पता चलता है कि भाजपा और संघ परिवार के सदस्य हमारे महाराज के प्रति कितने नीच विचार रखते हैं।”
इसी कड़ी में शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा, “सत्ता में बैठे लोगों को भी गुस्सा आना चाहिए कि एक बाबा महाराष्ट्र में आए और सीएम और बाकी सभी नेताओं की मौजूदगी में शिवाजी महाराज का इतिहास बदल दिया। बोलने से पहले महाराष्ट्र का इतिहास पढ़ना चाहिए।”
मुंबई, महाराष्ट्र: शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने बाबा बागेश्वर के बयान पर कहा, “मैं महाराष्ट्र की बात करता हूं। जो सत्ता में बैठे हैं, उनको भी दुख होना चाहिए कि एक बाबा महाराष्ट्र में आता है, उसके मंच पर राज्य के मुख्यमंत्री हैं, सरसंघचालक हैं, RSS प्रमुख हैं, नेतागण हैं, और… pic.twitter.com/0Nl0WOM0nH
— IANS Hindi (@IANSKhabar) April 26, 2026
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