जयपुर, 27 अगस्त (भाषा) राजस्थान उच्च न्यायालय के कई बार संघों के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने बृहस्पतिवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश संदीप मेहता द्वारा राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा को लेकर उठाए गए मुद्दों का समाधान उचित मंच के माध्यम से किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की आवश्यकता पर जोर दिया।
‘राजस्थान उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन, जयपुर’ के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल ने कहा कि स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति जरूरी है और किसे नियुक्त किया जाए, यह सक्षम प्राधिकारी का विशेषाधिकार है।
सोगरवाल ने कहा, “स्थायी मुख्य न्यायाधीश होना चाहिए। आप किसे नियुक्त करते हैं, यह आपका विशेषाधिकार है। हमें किसी से कोई आपत्ति नहीं है।’’
न्यायमूर्ति मेहता, जिनका मूल उच्च न्यायालय भी राजस्थान उच्च न्यायालय ही है, ने भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत को लिखे तीन पत्रों में न्यायमूर्ति शर्मा के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने प्रधान न्यायाधीश से राजस्थान उच्च न्यायालय के लिए राज्य के बाहर से किसी स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करने का आग्रह किया था।
न्यायमूर्ति मेहता ने दो, 10 और 17 अगस्त को लिखे अपने पत्रों में राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश पर ‘कुप्रशासन’’, ‘कदाचार/अनियमितताओं’’, ‘‘भाई-भतीजावाद’’और ‘‘पक्षपात’’ के आरोप लगाए हैं।
न्यायमूर्ति मेहता और अधिवक्ताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सोगरवाल ने कहा कि उन्हें सार्वजनिक रूप से उठाने के बजाय उचित मंच पर सुना और सुलझाया जाना चाहिए।
सोगरवाल ने कहा, ‘‘जहां तक मुद्दों का सवाल है, उनकी सुनवाई और समाधान उचित मंच पर होना चाहिए। ऐसे मुद्दों को सार्वजनिक रूप से उठाने से न्यायपालिका की छवि खराब हो रही है। यदि लगातार मुद्दे उठाए जा रहे हैं, तो उनकी सुनवाई होनी चाहिए।’’
राजस्थान उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ, जोधपुर के अध्यक्ष रंजीत जोशी ने कहा कि तीनों बार संघों के प्रतिनिधियों ने बैठक की और यह तय किया कि न्यायमूर्ति मेहता के पत्र में उठाए गए मुद्दे गंभीर हैं।
जोशी ने कहा, “आज तीनों एसोसिएशनों की बैठक हुई। इसमें तय किया गया कि वरिष्ठ न्यायाधीश द्वारा लिखे गए पत्र में गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं। घटनाओं को लेकर अधिवक्ताओं में भी नाराजगी है। न्यायपालिका निष्पक्ष होनी चाहिए और लोगों का उस पर विश्वास बढ़ना चाहिए। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसी घटना हो रही है।”
उन्होंने कहा कि इस मामले में आगे की रणनीति तय करने के लिए बार संघ फिर बैठक करेंगे। जोशी ने कहा, ‘‘इस मामले में क्या कदम उठाया जाना चाहिए, यह तय करने के लिए दो दिन बाद फिर बैठक निर्धारित की गई है।’’
राजस्थान उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ, जोधपुर ने इससे पहले भारत के प्रधान न्यायाधीश को पत्र लिखकर स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति का अनुरोध किया था और बार तथा पीठ के बीच संबंधों को लेकर चिंता जताई थी।
प्रधान न्यायाधीश को 25 अप्रैल को लिखे पत्र में अधिवक्ता संघ के तत्कालीन अध्यक्ष जोशी ने स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति का अनुरोध किया था। साथ ही उन्होंने बार और पीठ के संबंधों को लेकर चिंता जताते हुए न्यायमूर्ति शर्मा का राजस्थान से बाहर तबादला करने का अनुरोध किया था।
जोशी ने पत्र में लिखा था कि ‘वर्तमान परिस्थितियों में बार और पीठ के बीच अपेक्षित सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित नहीं हो पा रहा है।’’ उन्होंने आरोप लगाया था कि संवाद की कमी और अधिवक्ताओं के साथ व्यवहार के कारण “लगातार मतभेद और टकराव” हो रहे हैं।
जोशी ने लिखा था, ‘‘ऐसी परिस्थितियों में अदालत की गरिमा, न्यायिक कार्य की निरंतरता और सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय में जल्द से जल्द स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करना बेहद आवश्यक हो गया है।’’
उन्होंने यह भी अनुरोध किया था कि “वर्तमान प्रशासनिक परिस्थितियों को देखते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का राजस्थान राज्य से बाहर तबादला करने पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि बार और पीठ के बीच फिर से सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित किया जा सके।”
अप्रैल में दिए गए इस पत्र से पहले, दिसंबर 2025 में राजस्थान उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ, जोधपुर के तत्कालीन अध्यक्ष रतना राम ठोलिया ने भी प्रधान न्यायाधीश को एक पत्र दिया था।
ठोलिया के पत्र में ‘‘राजस्थान उच्च न्यायालय में वर्तमान में व्याप्त न्यायिक और प्रशासनिक माहौल को लेकर बढ़ती चिंताओं’ का उल्लेख किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि कानूनी बिरादरी को प्रभावित करने वाले फैसले अधिवक्ता संघ से पारंपरिक परामर्श के बिना एकतरफा तरीके से लिए जा रहे हैं, जिससे बार और पीठ के बीच संबंध प्रभावित हो रहे हैं।
ठोलिया ने जयपुर में पीठ के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन और हर महीने के अंतिम कार्यदिवस पर जोधपुर के वकीलों द्वारा न्यायिक कार्य में हिस्सा नहीं लेने की प्रथा का भी उल्लेख किया था। उनका आरोप था कि इसके बावजूद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की ओर से उन दिनों की वाद सूची जारी की जाती थी और प्रतिकूल आदेश पारित किए जाते थे।
दिसंबर में दिए गए प्रतिवेदन में राजस्थान उच्च न्यायालय में लंबे समय से स्थायी मुख्य न्यायाधीश नहीं होने का मुद्दा भी उठाया गया था।
ठोलिया ने कहा था कि राजस्थान उच्च न्यायालय काफी समय से स्थायी मुख्य न्यायाधीश के बिना काम कर रहा है और इससे प्रशासनिक शून्यता पैदा होने अथवा कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की शक्तियों के कथित अतिक्रमण की स्थिति बन सकती है।
उन्होंने कहा था कि न्यायपालिका की स्थिरता और वादकारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति अब महज औपचारिकता नहीं बल्कि आवश्यकता बन गई है। उन्होंने प्रधान न्यायाधीश से कॉलेजियम प्रक्रिया के माध्यम से स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति में तेजी लाने का अनुरोध किया था। यह भी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया था कि उच्च न्यायालय प्रशासन कानूनी पेशे की गरिमा तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सम्मान करते हुए काम करे।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने बुधवार को कहा कि न्यायमूर्ति मेहता द्वारा न्यायमूर्ति शर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर सार्वजनिक मंच पर फैसला नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित न्यायाधीश को ‘निष्पक्ष अवसर’ दिया जाना चाहिए।’’
भाषा बाकोलिया मनीषा संतोष
संतोष