अदालत ने पुरानी मोटरसाइकिल को कबाड़ में बदलने के मामले में मुआवजे की याचिका खारिज की

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अदालत ने पुरानी मोटरसाइकिल को कबाड़ में बदलने के मामले में मुआवजे की याचिका खारिज की

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  • Publish Date - August 27, 2026 / 03:56 PM IST,
    Updated On - August 27, 2026 / 03:56 PM IST

नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने निर्धारित उपयोग अवधि पूरी कर चुकी मोटरसाइकिल को कथित तौर पर अनुचित तरीके से जब्त कर कबाड़ में बदलने के लिए शहर के प्रशासन को एक करोड़ रुपये से अधिक मुआवजे का निर्देश देने का अनुरोध करने वाली एक व्यक्ति की याचिका खारिज कर दी।

मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने एकल न्यायाधीश के राहत देने से इनकार करने के फैसले को चुनौती देने वाली वाहन मालिक की अपील को खारिज कर दिया।

परिवहन अधिकारियों ने दिसंबर 2024 में सार्वजनिक सड़क से 18 साल पुरानी मोटरसाइकिल को यह कहते हुए जब्त कर लिया था कि यह अपनी निर्धारित उपयोग की अवधि पूरी कर चुके वाहन (ईएलवी) की श्रेणी में आती है।

इसके बाद मोटरसाइकिल को कबाड़ में बदल दिया गया।

अपीलकर्ता ने दलील दी कि मोटरसाइकिल उसके आवास के बाहर खड़ी थी और पिछले चार साल से इस्तेमाल नहीं किए जाने के कारण प्रदूषण नहीं फैला रही थी।

अपीलकर्ता ने दावा किया कि मोटरसाइकिल को उचित नोटिस दिए बिना ही कबाड़ में बदल दिया गया, जो संविधान के अनुच्छेद 300ए का उल्लंघन है।

संविधान के अनुच्छेद 300ए में निहित है कि किसी भी व्यक्ति को कानून के प्राधिकार के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।

अपीलकर्ता ने वाहन की ‘‘अनुचित जब्ती और उसे कबाड़ में तब्दील किए जाने के कारण मानसिक पीड़ा, लंबे समय तक प्रयास एवं उत्पीड़न’’ के लिए अधिकारियों से 1.43 करोड़ रुपये मुआवजे का अनुरोध किया था।

अपीलकर्ता ने कहा कि इस मोटरसाइकिल से उसका भावनात्मक जुड़ाव था। अपीलकर्ता ने कथित तौर पर अधिक मूल्य वाले, अच्छी तरह रखरखाव किए गए और पुरातन निजी वाहन को नष्ट करने के साथ-साथ मानहानि के लिए भी हर्जाने का अनुरोध किया।

वहीं, अधिकारियों ने अदालत को बताया कि मोटरसाइकिल को वाहन कबाड़ सुविधा के पंजीकरण एवं कार्य संबंधी नियम, 2021 के तहत कबाड़ में बदला गया था, क्योंकि वाहन मालिक तीन सप्ताह के भीतर आवश्यक घोषणा-पत्र दाखिल करने में विफल रहा था।

खंडपीठ ने 24 अगस्त को दिए गए अपने फैसले में एकल न्यायाधीश के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

एकल न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता को राहत के लिए दीवानी अदालत में वाद दायर करने को कहा था।

भाषा जितेंद्र गोला

गोला