भाजपा की बंगाल जीत भारत की आर्थिक दिशा को बदल सकती है : प्रदीप गुप्ता

Ads

भाजपा की बंगाल जीत भारत की आर्थिक दिशा को बदल सकती है : प्रदीप गुप्ता

  •  
  • Publish Date - May 22, 2026 / 07:17 PM IST,
    Updated On - May 22, 2026 / 07:17 PM IST

नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) चुनाव विश्लेषक प्रदीप गुप्ता ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत न केवल राज्य के भविष्य को बल्कि पूरे देश की आर्थिक दिशा को भी बदल सकती है। उन्होंने इसके पीछे पूर्वी भारत के विशाल प्राकृतिक संसाधनों, बंदरगाहों और अब तक पूरी तरह इस्तेमाल न हो सकी व्यापारिक संभावनाओं को अहम कारण बताया।

‘एक्सिस माई इंडिया’ के संस्थापक-अध्यक्ष गुप्ता ने कहा कि बिहार, ओडिशा, असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों का सामूहिक रूप से अत्यधिक आर्थिक और रणनीतिक महत्व है।

उन्होंने बुधवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘यह सिर्फ बंगाल का मामला नहीं है। वहां की जीत पूरे देश की दिशा और दशा बदल सकती है।’’

वह पश्चिम बंगाल में भाजपा की चुनावी जीत और 15 वर्षों बाद तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से हटाए जाने के व्यापक प्रभावों पर चर्चा कर रहे थे।

गुप्ता के अनुसार, पूर्वी भारत का महत्व उसके प्राकृतिक संसाधनों, समुद्री पहुंच और पूर्वोत्तर तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से संपर्क के कारण है। पश्चिम बंगाल की भौगोलिक स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अंडमान द्वीपों तक पहुंच प्रभावी रूप से पश्चिम बंगाल से होकर गुजरती है, जो उसके रणनीतिक महत्व को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से पूर्वी भारत संसाधनों और प्रवासन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

गुप्ता ने कहा कि जिन क्षेत्रों में मजबूत बंदरगाह और व्यापारिक नेटवर्क रहे, वे ऐतिहासिक रूप से समृद्धि के केंद्र बने।

उन्होंने कहा, ‘‘अक्सर कहा जाता है कि जिन देशों में सबसे अधिक बंदरगाह होते हैं, वे सबसे समृद्ध बनते हैं, क्योंकि व्यापार और कारोबारी गतिविधियां उन्हीं के जरिए चलती हैं। वस्तुओं और व्यापार की आवाजाही के बिना समृद्धि संभव नहीं है।’’

पूर्वी भारत की आर्थिक गिरावट पर चिंता जताते हुए गुप्ता ने बिहार और ओडिशा के विकास मॉडल पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि खनिज संपदा और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद इन राज्यों का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया। उन्होंने यह भी कहा कि असम और पूर्वोत्तर लंबे समय तक भौगोलिक और आर्थिक रूप से अलग-थलग रहे।

उन्होंने कहा, ‘‘बिहार की स्थिति देखिए। अगर कुछ समय के लिए ओडिशा की खदानों और प्राकृतिक संसाधनों को अलग कर दें, तो उसकी अर्थव्यवस्था में क्या बचता है? असम और पूर्वोत्तर वर्षों तक मुख्यधारा से लगभग कटे रहे।’’

पश्चिम बंगाल के बारे में गुप्ता ने कहा कि यह राज्य कभी भारत के सबसे बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्रों में से एक था और औपनिवेशिक तथा स्वतंत्रता के शुरुआती वर्षों में कई बड़ी कंपनियों के मुख्यालय यहां स्थित थे।

उन्होंने पिछले दशकों के दौरान कोलकाता से उद्योगों और कारोबारी समुदायों के पलायन का उल्लेख करते हुए कहा कि कई कंपनियों ने अपना कामकाज मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में स्थानांतरित कर लिया, जबकि कई कारोबारी परिवार बाद में विदेश चले गए।

उन्होंने सिंगूर में टाटा मोटर्स की नैनो परियोजना का उदाहरण देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल ने कई औद्योगिक अवसर गंवा दिए।

उन्होंने कहा, ‘‘जिन लोगों ने बंगाल की संभावनाओं का उपयोग करने की कोशिश की, जैसे नैनो फैक्टरी परियोजना, उन्हें वहां से बाहर कर दिया गया।’’

गुप्ता ने यह भी दावा किया कि इस बार पूर्वी भारत से जुड़े प्रवासी मतदाता वोट डालने के लिए घर लौटने को लेकर असाधारण रूप से दृढ़ दिखाई दिए, जो राजनीतिक बदलाव की मजबूत लहर का संकेत है।

मुंबई जैसे शहरों से लौट रहे लोगों के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कई मतदाता तमाम कठिनाइयों और चुनावी भागीदारी को लेकर आशंकाओं के बावजूद मतदान करने के लिए उत्साहित थे।

भाषा गोला नरेश

नरेश