बेंगलुरु, 22 मई (भाषा) कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने शुक्रवार को विभिन्न संगठनों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लेने के मंत्रिमंडल के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह कदम मंत्रिमंडल की एक उपसमिति की सिफारिशों पर आधारित है जिसने प्रत्येक मामले की विस्तार से समीक्षा की थी।
मंत्रिमंडल ने बृहस्पतिवार को राज्य भर के विभिन्न थानों में दर्ज 52 आपराधिक मामलों को अभियोजन से वापस लेने का निर्णय लिया।
परमेश्वर ने कहा, ‘‘कन्नड़ समर्थक संगठन और किसान संगठन कई वर्षों से अपने खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर ज्ञापन दे रहे थे। सरकार ने प्रत्येक मामले पर अलग-अलग विचार-विमर्श करने के बाद इसे मंत्रिमंडल की एक उपसमिति को भेज दिया। उपसमिति ने पाया कि इन मामलों को कानूनी रूप से वापस लिया जा सकता है।’’
उन्होंने बेंगलुरु में पत्रकारों से कहा कि राज्य भर के विभिन्न संगठनों के खिलाफ 52 मामले कल मंत्रिमंडल के समक्ष रखे गए थे और उन्हें वापस लेने का निर्णय लिया गया।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, वापस लिए गए मामले कन्नड़ समर्थक संगठनों, किसानों और उनके संगठनों, दलित कार्यकर्ताओं आदि के खिलाफ दर्ज किए गए थे।
इन मामलों में कन्नड़ कार्यकर्ता वटल नागराज के खिलाफ 10 मामले और 2022 में कलबुर्गी जिले के अलंद स्थित लाडले मुश्ताक दरगाह में हुई सांप्रदायिक हिंसा से संबंधित सात मामले शामिल हैं।
लाडले मुश्ताक दरगाह हिंसा से जुड़े मामलों को वापस लेने के आधार के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा, ‘‘मैं विस्तार से नहीं बताना चाहता। मंत्रिमंडल ने मामले वापस लेने का फैसला किया है।’’
उस घटना के दौरान पुलिस पर हुए हमले के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘यह फैसला सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद लिया गया है। फैसला अचानक नहीं लिया गया है।’’
भाषा सुरभि वैभव
वैभव