नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एमबीए छात्रों की छात्रवृत्ति का पैसा हड़पने के आरोप में भोपाल के ‘एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट कॉलेज’ और यूको बैंक के अधिकारियों समेत सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
दर्ज मामले के अनुसार, आरोपियों ने 118 फर्जी बैंक खाते खोलकर एमबीए छात्रों की सरकारी छात्रवृत्ति का पैसा हड़प लिया।
अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने यूको बैंक की वरिष्ठ शाखा प्रबंधक प्रेमा वर्मा, कॉलेज निदेशक विनय मल्होत्रा, उनके भाई आदित्य मल्होत्रा, सहायक प्रोफेसर मनोज जैन और विनेश मेश्राम तथा कॉलेज के कर्मचारी राम सिंह वर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
प्राथमिकी के अनुसार, भोपाल स्थित ‘एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट कॉलेज’ के एमबीए छात्रों की जानकारी और सहमति के बिना उनके नाम पर 118 बचत खाते खोले गए। इसके बाद, सरकार से मिली छात्रवृत्ति की रकम (99.48 लाख रुपये) इन बैंक खातों में जमा की गई, जिसे आरोपियों ने बेईमानी और धोखाधड़ी से हड़प लिया।
इसमें कहा गया है कि 2020-21 में ‘‘नकली हस्ताक्षर और गलत जानकारी का इस्तेमाल करके, तथा आवश्यक केवाईसी सत्यापन के बिना’’ ये खाते खोले गए थे।
प्राथमिकी के अनुसार, असली खाता-धारकों की लिखित मंज़ूरी के बिना, एक ही व्यक्ति राम सिंह को एटीएम/डेबिट कार्ड जारी करके सौंप दिए गए। आरोपी कॉलेज अधिकारियों और उनके साथियों के मोबाइल नंबरों को धोखाधड़ी से छात्रों के खातों से जोड़ा गया, जिससे ओटीपी मिल सके और छात्रवृत्ति की रकम खाते में जमा होने के दिन ही तुरंत निकाली जा सके।
इसमें आरोप लगाया गया है कि यूको बैंक की हबीबगंज शाखा में खाता खोलने, केवाईसी नियमों का पालन करने, प्रणाली सत्यापन, और एटीएम जारी करने की जिम्मेदारी संभालने वाली वरिष्ठ प्रबंधक प्रेमा वर्मा ने कॉलेज अधिकारियों के साथ ‘‘आपराधिक मिलीभगत’’ करके और बैंकिंग के तय नियमों का गंभीर उल्लंघन करते हुए खाता प्रक्रिया को अंजाम दिया।
वहीं, एक अन्य मामले में, सीबीआई ने तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने 2021 से 2024 के बीच वाहन क्षतिग्रस्त होने के नाम पर 411 फर्जी बीमा दावे कर ‘द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड’, भोपाल के साथ 4.30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की।
संबंधित प्राथमिकी में ग्वालियर निवासी अवधेश परमार, शैलेंद्र सिंह परमार और मनराज प्रजापति को नामजद किया गया है।
प्राथमिकी में कहा गया कि कई दावों को उन्हीं तस्वीरों और खराब पुर्ज़ों का इस्तेमाल करके निपटाया गया, जो पहले के दावों में जमा किए गए थे।
कुछ मामलों में, गाड़ी की मरम्मत की तस्वीरें किसी और गैराज की थीं, जबकि मरम्मत के बिल किसी दूसरे गैराज से जारी किए गए थे, जिससे दावे से जुड़े दस्तावेज़ों में गड़बड़ी का पता चलता है।
भाषा
नेत्रपाल अविनाश
अविनाश