नयी दिल्ली, 18 सितंबर (भाषा) पर्यावरण मंत्रालय ने दिल्ली सहित पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक के लिए नए नियमों का प्रस्ताव दिया है।
प्रस्तावित नियमों के तहत, जिस खेत में पराली जलाने की घटना होगी, उसे घटना की तारीख से 15 महीने के लिए खतरनाक श्रेणी (रेड कैटेगरी) में रखा जाएगा। हालांकि, इस श्रेणी में रखे जाने के बाद क्या कानूनी/व्यावहारिक परिणाम होंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं किया गया है।
बुधवार को जारी मसौदा नियमों के अनुसार, ‘‘ यदि संबंधित भूमि पर पराली जलाने की कोई अगली घटना पाई जाती है या साबित होती है, या इन नियमों के तहत लगाया गया पर्यावरण मुआवजा जमा नहीं किया जाता है, तो यह खतरनाक श्रेणी अगले 15 महीनों की अवधि तक लागू रहेगी।’’
हालांकि, इन नियमों में पराली जलाने पर पर्यावरण मुआवजे (जुर्माने) की 2023 की दरों को बरकरार रखा गया है।
पराली जलाने के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले किसानों पर दो एकड़ से कम कृषि भूमि के लिए ₹5,000, दो से पांच एकड़ के बीच की भूमि के लिए ₹10,000 और पांच एकड़ से अधिक भूमि के लिए ₹30,000 का जुर्माना लगाया जाएगा।
मसौदा नियमों में पर्यावरण मुआवजे की राशि के उपयोग से जुड़ा एक अनुभाग भी शामिल है। वसूले गए मुआवजे का उपयोग फसल विविधीकरण कार्यक्रमों को बढ़ावा देने, बायोमास उपयोग व भंडारण बुनियादी ढांचे के विकास व संचालन में सहायता करने और फसल अवशेष प्रबंधन के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को वित्तपोषित करने के लिए किया जाएगा।
सरकार ने इस प्रस्ताव पर हितधारकों से 60 दिनों के भीतर सुझाव एवं आपत्तियां मांगी हैं।
भाषा शोभना अविनाश
अविनाश