नयी दिल्ली, 31 जुलाई (भाषा) केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने शुक्रवार को परामर्श जारी कर सभी राज्यों के रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरणों (रेरा) से पश्चिम एशिया में संघर्ष से उत्पन्न व्यवधानों से प्रभावित रियल एस्टेट परियोजनाओं के पंजीकरण और पूरा होने की समयसीमा में चार महीने का विस्तार देने को कहा।
मंत्रालय ने सभी नियामक प्राधिकरणों को जारी एक सलाह में कहा कि पश्चिम एशिया में मौजूदा स्थिति ने वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है, जिसके परिणामस्वरूप निर्माण सामग्री की कमी हो गई है और इससे रियल एस्टेट परियोजनाओं के समय पर निर्माण पर असर पड़ रहा है।
इसमें कहा गया है कि मंत्रालय को रियल एस्टेट क्षेत्र के हितधारकों से परियोजनाओं के समय पर पूरा होने में आने वाली बाधाओं के मद्देनजर राहत की मांग करते हुए कई अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं।
इस साल 29 अप्रैल को वित्त मंत्रालय के तहत व्यय विभाग द्वारा जारी एक कार्यालय ज्ञापन का हवाला देते हुए, परामर्श में कहा गया कि अप्रत्याशित घटना संबंधी खंड को लागू करने के लिए पश्चिम एशिया में चल रही स्थिति को ‘युद्ध’ के रूप में माना गया है।
रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 6 अप्रत्याशित घटना के कारण रियल एस्टेट परियोजना के पंजीकरण के विस्तार का प्रावधान करती है, जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ रियल एस्टेट परियोजना के नियमित विकास को प्रभावित करने वाला ‘युद्ध’ भी शामिल है।
संघर्ष से उत्पन्न होने वाली अप्रत्याशित परिस्थितियों के मद्देनजर, मंत्रालय ने नियामक अधिकारियों को पंजीकृत रियल एस्टेट परियोजनाओं के पंजीकरण और संबंधित समापन समयसीमा को चार महीने तक बढ़ाने के लिए उपयुक्त आदेश जारी करने की सलाह दी है।
भाषा वैभव दिलीप
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